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गांधीनगर, 11 जनवरी (हि.स.)। वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के अंतर्गत गुरुवार को गांधीनगर के महात्मा मंदिर में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष परिषद में विशेषज्ञों का परिसंवाद आयोजित हुआ। इसमें इन-स्पेस, अहमदाबाद के निदेशक डॉ विनोद कुमार ने देश की अर्थव्यवस्था तथा विकास में अंतरिक्ष के योगदान पर विस्तार से विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र के रणनीतिक विकास से ब्लू इकोनॉमी, ग्रीन इकोनॉमी, डिजिटल इकोनॉमी, टिकाऊ विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति आदि में भारत ने उत्तरोत्तर प्रगति की है। भारत में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या में वृद्धि हुई है। स्पेस सेक्टर में आगामी 12 वर्ष में 22 अरब रुपये के निवेश की संभावना है।
एवीएम राजीव रंजन ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में अब ट्रांसफॉर्मेशन का युग आया है। भारत में निजी सेक्टर अब सक्रिय होगा, जिसके परिणाम आगामी वर्षों में देखने को मिलेंगे। रक्षा अनुसंधान क्षेत्र में भी भारत आत्मनिर्भर बनने की ओर आगे बढ़ रहा है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर शैजूमोन सीएस ने कहा कि भारत में परिवर्तन आ रहे हैं। अंतरिक्ष द्वारा एक साथ कई सारी आर्थिक गतिविधियां शुरू होने की अपार संभावना है। अंतरिक्ष क्षेत्र अब रोजगार निर्माण में भी योगदान दे रहा है। ऑस्ट्रेलिया के ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट कमिशनर लियो ब्रेमेनिस ने ऑस्ट्रेलिया के स्पेस इनोवेशन के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भारत में अंतरिक्ष स्टार्टअप्स तेजी से बढ़ रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया-भारत संबंध इसके लिए अधिक फायदेमंद सिद्ध होंगे।
इस अवसर पर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के विग्नेश संथानम ने बैकबोन एप्लिकेशन्स तथा स्पेस की रीच एप्लिकेशन्स, ऑटोनोमी, रोबोटिक्स, उत्पादन आदि के बारे में चर्चा की।
हिन्दुस्थान समाचार/बिनोद/आकाश
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