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गुवाहाटी, 26 फरवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि उनकी सरकार पिछले दरवाजे से नहीं बल्कि ‘सामने के दरवाजे’ से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लाएगी। मुख्यमंत्री डॉ सरमा आज असम विधानसभा के चालू बजट सत्र में सरकार पर लगाए जा रहे इस आरोप का जवाब दे रहे थे कि सरकार परोक्ष रूप से यूसीसी लाना चाह रही है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि परोक्ष रूप से नहीं बल्कि सामने से यूसीसी को लाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘समान नागरिक संहिता उत्तराखंड में लागू है। समान नागरिक संहिता चार बिंदुओं से संबंधित है- नाबालिग शादियों को रोकना, बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाना, उत्तराधिकार कानून और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण। समान नागरिक संहिता पारंपरिक रीति-रिवाजों या प्रथाओं से संबंधित नहीं है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड विधानसभा में बीते सात फरवरी को यूसीसी से संबद्ध विधेयक पारित किया था। जिसमें, अनुसूचित जनजाति को छोड़कर सभी समुदायों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप पर समान नियम लागू करने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री डॉक्टर शर्मा पहले ही इसकी घोषणा कर चुके हैं कि असम में भी उच्च कानून लाया जाएगा। ऐसी चर्चा थी कि विधानसभा के चालू बजट सत्र के दौरान सरकार यूसीसी लाएगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हालांकि मुख्यमंत्री यह घोषणा पहले कर चुके हैं कि असम गुजरात उत्तराखंड के बाद यूसीसी को लागू करने वाला तीसरा राज्य होगा। देखना यह है कि सरकार इस दिशा में क्या रुख आने वाले दिनों में अख्तियार करती है।
हिन्दुस्थान समाचार /श्रीप्रकाश/प्रभात