[ad_1]

– फलीभत हुई पीढ़ियों की तपस्या, कारसेवकों के भक्तिभाव को मिला मुकाम
अयोध्या, 22 जनवरी (हि.स.)। पांच सौ वर्षों के बाद अपनी जन्मभूमि पर बने नवनिर्मित मंदिर में श्रीरामलला विराजमान हुए। इसके साथ ही भक्तों और जनभावनाओं की अभिलाषा भी पूरी हुई। पीढ़ियों की तपस्या फलीभूत हुई तो कारसेवकों के भक्ति भाव को मुकाम मिल गया। दोपहर 12:05 बजे से 12:55 बजे तक चलने वाली पूजा के दौरान भारतीय वाद्ययंत्रों पर गायकों की सुर लहरियों में अतिथि गोता लगाते रहे तो विश्व को समरसता की सीख भी मिलती रही। अयोध्या की अपरम्पार महिमा से एक बार फिर कण-कण में राम स्थापित होते रहे और रोम-रोम में बसने वाले राम, हर मानव मन में पुलकित होते रहे।
शंख ध्वनि के बीच 12:05 बजे जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने हाथों में भगवान श्रीराम का छत्र लेकर मंडप की ओर बढ़ना शुरु किया तब पूरा जनमानस खुशियों से उछल पड़ा। मंदिर के भीतर और टीवी स्क्रीन के सामने बैठे लोग जय श्रीराम का उद्घोष करने लगे। मानो सभी लोग इस जयघोष से कौशल्या के राघव, श्रीरामलला का स्वागत कर रहे हों। इस क्षण को अपनी आंखों में छिपा लेने को आतुर रामभक्तों की खुशियां बया नहीं की जा सकती। इस दौरान लोग यह भी कह रहे थे कि श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा, कारसेवकों के भक्तिभाव का मुकाम है।
इधर, अपने हाथों में भगवान का छत्र लिए सीढ़ियों पर एक विजेता की तरह चल रहे प्रधानामंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्य मंडप में पहुंचे और भगवान के छत्र को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी जी महराज को सौंपने के साथ ही आचार्य सुनील शास्त्री के सामने आसन ग्रहण कर संकल्प लिया। लोगों ने एक बार फिर जयघोष शुरु किया और यह तब तक चलता रहा जब तक पीएम मोदी गर्भगृह की ओर प्रस्थान न कर गये। मंदिर परिसर के बाहर सड़कों पर इस क्षण का इंतजार कर रहे लोगों के उत्साह में भी कोई कमी नहीं आई थी। उन्होंने अपने हाथों में लिए वाद्ययंत्रों की आवाज को तेज कर दिया। ढोलक आदि भारतीय वाद्ययंत्रों की थाप तेज कर दी। महिलाओं के साथ पुरुषों और बच्चों की थिरकन शुरू हो गयी। इस अद्भुत नजारा से पूरी अयोध्या पुलकित होती रही। बलिदानी कारसेवक भी शायद मुस्कुराते रहे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरीखे प्रमुख लोगों की मौजूदगी में 12:07 बजे जब पीएम मोदी ने गर्भगृह में प्रवेश किया, तब भी उत्साहित लोगों ने जयघोष किया। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच मंडपों को पार कर गर्भगृह तक की यात्रा पूरी की।
इधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सम्मिलित भाव मानो, राष्ट्र के लोगों की ओर से लिए जा रहे राष्ट्रमंदिर के संकल्प के समय दो राष्ट्रपुरुषों के नये स्वरूप का सम्मिलन रहा हो। इनका यह सम्मिलन बहुत कुछ बयां कर रहा था। इधर, वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच 12:30 बजे प्राण प्रतिष्ठा को संपन्न करा लिया गया। प्राण प्रतिष्ठा समारोह के संपन्न होने के बाद अयोध्या की सड़कों और गलियों में उत्सव का माहौल है।
हिन्दुस्थान समाचार/डॉ. आमोदकांत /राजेश