Warning: Undefined array key "mode" in /home/azaannews/public_html/wp-content/plugins/sitespeaker-widget/sitespeaker.php on line 13
[ad_1]

हमीरपुर,12 जनवरी (हि.स.)। वर्ष 1990 अक्टूबर माह में राम मंदिर आंदोलन के दौरान चेन्नई से आए राम भक्तों को हिरासत में लेने के दौरान आक्रोशित आंदोलनकारियों ने बाजार बंद का ऐलान किया था। बाजार बंद करने के दौरान दरोगा से हुई झड़प के बाद शांति भंग में भेजे गए भक्तों ने एसडीएम कोर्ट में जय श्री राम के जयकारे लगा दिए। इससे नाराज एसडीएम ने तीन राम भक्तों को 40 दिन की सजा सुनाई थी। राम भक्तों को हमीरपुर के साथ बांदा जेल में रहकर सजा भुगतनी पड़ी थी।
वर्ष 1990 में राम मंदिर आंदोलन चरम पर था। आंदोलन में शामिल रामभक्त जमुनादास गुप्ता पुत्र केदार पौथिया वाले बताते हैं कि चेन्नई से एक बस में 70 कार सेवक अयोध्या जा रहे थे। इनको प्रशासन ने हिरासत में ले लिया था। इससे नाराज होकर रामभक्त सुमेरपुर कस्बे का बाजार बंद करा रहे थे। उन्होंने बताया कि बाजार बंद कराते समय उनकी थाने में तैनात दरोगा से झड़प हो गई थी। इस पर दरोगा ने उनको हिरासत में लेकर शांति भंग में चालान कर दिया। चालान होने की खबर पाकर सुमेरपुर के पूर्व चेयरमैन सतीशचंद्र अवस्थी व समाजसेवी बेनीबाबू के साथ एसडीएम सदर की कोर्ट में जमानत के लिए पहुंचे थे।
बहस के दौरान तीनों ने एसडीएम कोर्ट में जय श्री राम का नारा लगाने लगे। इससे तत्कालीन एसडीएम नाराज हो गए और तीनों को 40 दिन की सजा सुनाई थी। तीनों लोगों को हमीरपुर एवं बांदा की जेल में रहकर सजा काटनी पड़ी थी। उन्होंने बताया कि अब राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। लेकिन राम मंदिर देखने के लिए पूर्व चेयरमैन सतीश चंद्र अवस्थी व बेनीबाबू इस दुनिया में नहीं है।
उन्होंने बताया कि उनको राम मंदिर निर्माण से बेहद खुशी है। उनका कहना है कि उस समय का संघर्ष का प्रतिफल आज देखने को मिल रहा है और 33 वर्ष बाद कारसेवकों का सपना सच हुआ है। उनकी शपथ राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे पूरी हुई है।
हिन्दुस्थान समाचार/पंकज/मोहित
[ad_2]