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बलरामपुर, 13जनवरी(हि.स.)। अयोध्या में नवनिर्मित भव्य मंदिर में प्रभु श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर हर ओर उत्सव मनाया जा रहा है। 22 जनवरी को हर कोई अपने-अपने तरह से अपने आराध्य के प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मनाने की तैयारी में जुटे हैं।
इनमें सबसे ज्यादा उत्साह उन राम भक्तों में है जो मंदिर आंदोलन के दिनों में जेल गए। वे आज इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने जा रहे हैं।
राम मंदिर आंदोलन के दिनों बाराबंकी जेल में एक महीना तक रहे शिशु काल से ही जुड़े राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक तुलसीपुर के निवासी राम जी आर्य बताते हैं कि 1984 में सरयू का जल लेकर आंदोलन का संकल्प लिया गया था। आंदोलन में शीर्ष संतों अवैद्यनाथ, साध्वी ऋतंभरा, स्वामी चिन्मयानंद के साथ रथयात्रा में भी शामिल हुआ था। चार अक्टूबर 1990 को जब शिलापूजन हुआ तो उस दौरान नगर तुलसीपुर से उनके साथ एक दर्जन से अधिक रामभक्तों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार कर गोंडा जेल भेजा गया। वहां जगह न होने पर बाराबंकी जेल भेज दिया गया। वहां पूर्व विधायक राम प्रताप वर्मा, तुलसीदास राय चंदानी, सेवानिवृत्त डीजीपी रामभक्त विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय पदाधिकारी श्री चंद दीक्षित से मुलाकात हुई।
और जेल में ही राम भक्तों का शाखा लगता था। जेल में ही जय श्री राम का उद्घोष होता था। नारा लगाता था हम हिंदू हैं, 60 करोड़ ताला देंगे तोड़़ मरोड़।
रामजी आर्य के साथ ही एक माह के लिए बाराबंकी जेल में बंद हुए तुलसीपुर के निवासी सुरेश मित्तल उन दिनों को याद कर बताते हैं कि आंदोलन के दिनों में सत्ता पक्ष के खिलाफ जोरदार आक्रोश था। जगह-जगह गिरफ्तारी चल रही थी। जेलों में जगह नहीं बची थी। आज प्रभु अपने मंदिर में स्थापित हो रहे हैं। हम सभी बहुत ही सौभाग्यशाली पीढ़ी है। जो अपने आराध्य के प्राण प्रतिष्ठा समय के साक्षी बन रहे हैं। 22जनवरी हम सभी अपने घरों में प्रभु श्री राम का पूजन व दीपोत्सव मनाएंगे।
हिन्दुस्थान समाचार/प्रभाकर कसौधन
/दिलीप
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