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हमीरपुर,13 जनवरी (हि.स.)। वर्ष 1990 में कारसेवा के दौरान कस्बा सुमेरपुर के श्री गायत्री विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में अस्थायी जेल बनाकर 300 से ज्यादा कारसेवकों को निरुद्ध किया गया था। तब शुरुआत के तीन दिनों तक कारसेवकों को भूखा ही रहना पड़ा था। वहीं बाद के पांच दिनों उन्हें एक टाइम ही खाना दिया जाता था। उन दिनों को याद कर कारसेवक सिहर उठते हैं। उनका कहना है कि आज उनका संघर्ष सफल हुआ और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होने से मन बेहद गदगद है।
उल्लेखनीय है कि भाजपा, विहिप, बजरंग दल एवं आरएसएस के आवाह्न पर राम मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा की गई थी। पूरे देश से कारसेवकों को अयोध्या बुलाया गया था। तत्कालीन सपा सरकार विवादित ढांचे को बचाने के लिए कटिबद्ध थी। लिहाजा तब कारसेवकों को जिले में ही रोकने के आदेश दिए गए।
उस समय जिला प्रशासन ने कस्बे के श्री गायत्री विद्या मंदिर इंटर कॉलेज को अस्थायी जेल बनाकर कारसेवकों को निरुद्ध किया था। तब यहां पर बंद रहे कारसेवक जगमोहन पांडे, मनोज पालीवाल ने बताया कि उन्हें हिरासत में लेकर यहां बंद किया गया, तब काॅलेज में 300 से अधिक कारसेवक निरूद्ध हुए थे। आठ दिनों तक उन्हें हिरासत में रखा गया था। शुरू के तीन दिन भूखा ही रहना पड़ा था।
कारसेवकों ने बताया कि बाद के पांच दिनों एक टाइम ही खाना मिला था। इस तरह यातनाओं के बीच रामकाज में आठ दिन किस तरह गुजर गए पता ही नहीं चला। मनोज पालीवाल ने बताया कि संजय शुक्ला सहित कई अन्य साथी अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन आज जब मेरे आराध्य भगवान श्री राम का भव्य मंदिर अयोध्या में बनकर तैयार हो रहा है तो मन प्रफुल्लित है कि लंबे संघर्ष के बाद ही सही राम मंदिर निर्माण का सपना सच साबित हुआ और उनका संघर्ष कामयाब रहा। जगमोहन पांडे ने बताया कि जेल से छूटने के बाद कारसेवकों ने नारा लगाया था कि जेल के ताले टूट गए कारसेवक छूट गए।
हिन्दुस्थान समाचार/पंकज/राजेश
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