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भागलपुर, 02 मार्च (हि.स.)। बिहार कृषि महाविद्यालय सबौर में शनिवार को स्ट्रॉबेरी प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया।
इसका मुख्य उद्देश्य किसानों के बीच स्ट्रॉबेरी के उत्पादन तकनीक को दिखाना एवं राज्य में स्ट्रॉबेरी के उत्पादन को बढ़ावा देना है, ताकि किसानों को ज्यादा से ज्यादा आमदनी प्राप्त हो सके। स्ट्रॉबेरी प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन उद्यान विभाग (फल एवं फल प्रौद्योगिकी), बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर एवं कृषि विज्ञान केन्द, सबौर द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन स्ट्रॉबेरी शोध परियोजना की मुख्य अन्वेशक डॉ रूबी रानी ने परियोजना के तहत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सह-अधिष्ठाता एवं प्राचार्य डॉ एस0 एन राय जिसके मुख्य अतिथि अधिष्ठता कृषि डॉ अजय कुमार साह थे। इसमें विभाग के अध्यक्ष डॉ अहमर अफताब, उपनिदेशक शोध डॉ शैलबाला देई विभाग के वैज्ञानिकगण कृषि विज्ञान केन्द के वैज्ञानिक डॉ ममता कुमारी, कृषक एवं आर ए डब्ल्यू ई के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान डॉ रूबी रानी ने राज्य के स्ट्रॉबेरी उत्पादन एवं समस्याओं पर प्रकाश डाला तथा विश्वविद्यालय द्वारा किये गए प्रयासों एवं स्ट्रॉबेरी पर किये गए शोध की संक्षिप्त जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान स्ट्रॉबेरी कृषिकों ने स्ट्रॉबेरी प्लांटिग मेटेरियल की समस्या से अवगत कराया और बताया कि स्ट्रॉबेरी के नए पौध हमेषा पूना, महाबलेश्वर या हिमाचल प्रदेश से लाना पड़ता है तथा सही समय पर उपयुक्त मात्रा में प्राप्त नहीं हो पाता जिससे फलन प्रभावित होता है।
उपनिदेशक शोध डॉ शैलबाला देई ने अपने संबोधन में इन समस्या का शोध के द्वारा निदान करने पर बल दिया। अध्यक्ष उद्यान विभाग (फल) डॉ अहमर अफताब ने बताया कि स्ट्रॉबेरी के मूल्यवद्धित उत्पाद जैसे जैम, शर्बत, स्कवास आदि के अतिरिक्त तैयार कर ज्यादा मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। अधिष्ठाता कृषि ने पौधा उपलब्धि की कमी को दूर करने पर बल दिया तथा बिहार के जलवायु अनुकूल किस्मों की आवश्यकता पर भी बल दिया। कार्यक्रम का समापन डॉ रूबी रानी के धन्यवाद ज्ञापन से हुई।
हिन्दुस्थान समाचार/बिजय