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हरिद्वार, 28 जनवरी (हि.स.)। स्वास्थ्य की चुनौतियों को कम करने के लिए खेल एक प्राकृतिक साधन है। उम्र के पड़ाव में भी खेल एक प्रभावी एवं कारगर उपाय है। प्रत्येक उम्र के व्यक्ति को अपने जीवन में खेल से जुड़े रहने का प्रयास करते रहना चाहिए। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिवकुमार चौहान ने अभ्युदय संस्था द्वारा आयोजित कार्यशाला में विषय प्रवर्तक के रूप में यह बात कही।
युवा बने रहने के प्राकृतिक एवं प्रभावी उपाय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में विषय प्रवर्तक के रूप में डॉ. शिवकुमार चौहान ने कहा कि जीवन में तनाव सभी बीमारियों का मुख्य कारण है। तनाव के कारण शरीर की शारीरिक एवं मानसिक स्थिति पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है। फलस्वरूप जीवन में खुश रहने और खेलने के अवसर कम होने लगते हैं। दिनभर के क्रिया कलापों के कारण मृत होने वाली कोशिकाओं की संख्या में बढ़ोतरी होने के कारण युवा चेहरा मुरझाने लगता है।
डॉ. चौहान ने कहा कि खेल एकमात्र प्राकृतिक उपाय है, जो व्यक्ति के जीवन में खुश रहने और खिलखिलाने के अवसर बरकरार रखते हैं। अपेक्षाकृत मृत कोशिकाओं की संख्या में कमी से व्यक्ति युवा बना रहता है।
कार्यशाला में आयुर्वेद, योग, फिजियोथैरेपी तथा चिकित्सा जगत के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यशाला का शुभारम्भ आयुर्वेदाचार्य डॉ. जगत राम, संस्था अध्यक्ष प्रो. रमेश शर्मा द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करके किया। संचालन डॉ. दीपिका सिंह तथा अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कुलदीप चौहान ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार/ रजनीकांत/रामानुज