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जींद, 11 फ़रवरी (हि.स.)। जींद के एकलव्य स्टेडियम में रविवार को पेंशन बहाली संघर्ष समिति हरियाणा के आह्वान पर पेंशन संकल्प महारैली का आयोजन हुआ। इस रैली में ऐलान किया गया कि यदि हरियाणा सरकार 20 फरवरी से चलने वाले बजट सत्र में कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल नहीं करती है तो हरियाणा में राज्य सरकार के तीन लाख से अधिक नियमित कर्मचारी, दो लाख पेंशनर्स और एक लाख केंद्रीय कर्मचारी मिलकर कुल छह लाख परिवार आगामी चुनावों के लिए वोट फोर ओपीएस की मुहिम चलाएंगे।
रैली में कर्मचारियों ने शपथ ली कि कर्मचारियों ने आजतक अपने वोट का प्रयोग करके नेताओं को विधायक या सांसद बना कर उन्हें पेंशन के योग्य बनाया है लेकिन अबकी बार कर्मचारी और उनके परिवार और रिश्तेदारों अपनी पेंशन के लिए वोट करेंगे। रैली में प्रदेशाध्यक्ष विजेंदर धारीवाल के नेतृत्व में भारी संख्या में प्रदेशभर से कर्मचारी एकत्रित हुए और अपनी आवाज को बुलंद किया। रैली में राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा पहुंचे और कर्मचारियों की ओपीएस की मांग का समर्थन किया।
रैली को संबोधित करते हुए प्रदेशाध्यक्ष विजेंदर धारीवाल, प्रदेश महासचिव रिषी नैन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनुप लाठर ने कहा कि प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल, अनूप लाठर ने कहा कि सत्तासीन लोग खुद कई कई पेंशन लेते हैं जबकि कर्मचारियों की पेंशन को सरकारी खजाने पर बोझ बताते हैं, जबकि आंकड़े इसके विपरीत है। 2018-19 के सरकारी आंकड़े के अनुसार सैंकड़ों की संख्या में पूर्व विधायकों की पेंशन पर सालाना 213 करोड़ रुपये खर्च किए गए वहीं सेवाकाल के दौरान या रिटायर होने के बाद मृत कर्मचारियों के लगभग एक लाख आश्रित परिवारों को मिलने वाली फैमिली पेंशन पर सालाना 661 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2019-20 में पूर्व विधायकों के लिए पेंशन की राशि 33 प्रतिशत बढकर 284 करोड़ हो गई। सत्तासीन लोगों के द्वारा नेताओं की पेंशन बोझ न लग कर विकास और सम्मान दिखती है लेकिन कर्मचारियों की पेंशन बोझ लगती है। जबकि सच्चाई इसके विपरीत है। पेंशन बहाली संघर्ष समिति आमजन को सच्चे आंकड़ों से अवगत कराएगी।
जींद में कर्मचारियों की ललकार, पेंशन बहाल न होने पर करेंगे सत्ता का पलटवार
एकलव्य स्टेडियम में लाखों की संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने हुंकार भरी कि सत्ता जब जब कर्मचारियों के हकों पर ढाका डालती है और कर्मचारियों से टकराने का काम करती है तब तब सत्तादल को सत्ता को गंवानी पड़ी है। धारीवाल व अनूप लाठर ने कहा कि सरकार दमनकारी और तानाशाही नीति अपना कर कर्मचारियों को उनके संवैधानिक हक से वंचित रख रही है। हरियाणा का कर्मचारी ये शोषण कभी सहन नहीं करेगा और अपने हक के लिए वोट की चोट के लिए भी तैयार है।
हिन्दुस्थान समाचार/ विजेंद्र/संजीव