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कोकराझाड़ (असम), 10 फरवरी (हि.स.)। बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के अध्यक्ष हग्रामा महिलारी ने कहा है कि आज 22वें बोडोलैंड दिवस को मानते हुए उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) का गठन करके बोडोलैंड के विकास का मार्ग प्रशस्त किया था। इस समझौते का हस्ताक्षरकर्ता होने के लिए उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। एक कार्यक्रम में आज यहां भाग लेने के बाद हग्रामा पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सत्तारूढ़ दल यूपीपीएल के नेता प्रमोद बोड़ो को भी इस दिवस का पालन करना चाहिए, क्योंकि यदि बीटीसी का गठन नहीं होता तो आज प्रमोद बोड़ो को यह कुर्सी नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि 15 वर्षों के बोडोलैंड के उनके शासनकाल में जो भी काम हुए उससे बोडोलैंड की स्थिति में बदलाव आया। लेकिन, उनके कार्यकाल के बाद बोडोलैंड में कोई भी काम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बोडोलैंड के वर्तमान नेता बैठकर सिर्फ सत्ता सुख भोग रहे हैं।
बाद में सोशल मीडिया के जरिए हग्रामा महिलारी ने बताया कि 22वें बोडोलैंड दिवस के अवसर पर, मैं 10 फरवरी, 2003 को बीटीसी समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से इस क्षेत्र में हुई प्रगति और विकास के लिए बीटीसी के लोगों को हार्दिक बधाई देना चाहता हूं। इससे बीटीसी के लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया, जो पहले शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित थे। बोडोलैंड विश्वविद्यालय, सीआईटी, बीबी इंजीनियरिंग कॉलेज, कोकराझाड़ मेडिकल कॉलेज की स्थापना और कोकराझाड़ कॉलेज को कोकराझाड़ सरकार में अपग्रेड करना। अन्य पहलों के अलावा, कॉलेज ने क्षेत्र में विकास और समृद्धि के एक नए युग की शुरुआत की है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण और एनटीपीसी, सलाकाटी का पुनरुद्धार भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हैं।
वहीं, हग्रामा महिलारी ने बीटीसी को शुरू से ही निरंतर समर्थन देने के लिए भारत सरकार और असम सरकार के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समझौते की सफलता बीटीसी के लोगों के समर्पण और कड़ी मेहनत का प्रमाण है, जिन्होंने देश के बाकी हिस्सों के साथ जुड़ने के लिए अथक प्रयास किया है। इस समझौते से बीटीसी के लोगों के जीवन में जो बदलाव आया है, उससे कोई इनकार नहीं कर सकता।
हिन्दुस्थान समाचार/श्रीप्रकाश/आकाश