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-सरकार असम के राजनीतिक इतिहास के दूसरे और तीसरे खंड को प्रकाशित करने पर विचार कर रही : सीएम
गुवाहाटी, 25 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने आज दिसपुर स्थित लोक सेवा भवन में आयोजित एक समारोह में प्रतिष्ठित इतिहासकार डॉ. राजेन सैकिया द्वारा संपादित असम का राजनीतिक इतिहास का पहला खंड जारी किया। यह पुस्तक 1947 से 1971 तक असम की स्वतंत्रता के बाद की अवधि के राजनीतिक इतिहास को कवर करती है।
इस अवसर पर बोलते हुए, मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने कहा कि पुस्तक के पहले भाग में आजादी की शुरुआत से लेकर असम के राजनीतिक विकास को शामिल किया गया है। पुस्तक का पहला भाग पाठकों को असम की आजादी के बाद के पहले 24-25 वर्षों के महत्वपूर्ण मुद्दों के बारे में बताने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक पाठकों को उन राजनीतिक घटनाओं से परिचित होने का अवसर देगी जिन्होंने असम के सामाजिक-आर्थिक जीवन को आकार दिया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि असम के पूर्व मुख्यमंत्री भारत रत्न गोपीनाथ बोरदोलोई ने राज्य के समग्र विकास के लिए गौहाटी विश्वविद्यालय और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पुस्तक में प्राचीन कामरूप से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन तक की घटनाओं पर भी प्रकाश डाला गया है, जो उनके अनुसार सराहनीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पाठकों, विशेषकर अन्य राज्यों के उन लोगों को काफी मदद मिलेगी, जो असम के इतिहास से परिचित नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने इस पुस्तक के सफल प्रकाशन में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि असम के इतिहास की एक लंबी परंपरा है। डॉ. सूर्य कुमार भुइयां, हितेश्वर बरबरुवा, कनकलाल बरुवा, पद्मनाथ गोहेनबरुवा सहित अन्य लोगों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने इतिहास को नए रूप में पेश किया है। मुख्यमंत्री ने तथ्यात्मक साक्ष्यों के आधार पर इतिहास लिखने की जरूरत पर बल दिया। उनका मत था कि इतिहासकार को किसी भी ऐतिहासिक घटना का विश्लेषण करने के लिए वर्तमान परिप्रेक्ष्य को प्रतिबिंबित नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय इतिहासकारों ने हमेशा मुहम्मद बख्तियार खिलजी के साहस का उल्लेख और प्रकाश डाला है, जिन्होंने भारत में मंदिर तोड़े थे। लेकिन कामरूप राजा पृथु, जिन्होंने मुहम्मद बख्तियार खिलजी को हराया था और असम में उनका विरोध किया था, पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 1972 से 2001 और 2002 से 2020 तक को कवर करते हुए असम के राजनीतिक इतिहास के दूसरे और तीसरे भाग को प्रकाशित करने पर विचार कर रही है।
राज्यसभा सांसद और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव पबित्र मर्घेरिटा, शिक्षा विभाग, सरकार के सलाहकार प्रोफेसर डॉ. नानी गोपाल महंत, डीजीपी जीपी सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. रवि कोटा, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह एवं राजनीतिक अविनाश पुरूषोत्तम दास जोशी, “असम का राजनीतिक इतिहास” पुस्तक के संपादक डॉ. राजेन सैकिया, प्रकाशन बोर्ड के उपाध्यक्ष सुमंत चालिहा और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
हिन्दुस्थान समाचार/श्रीप्रकाश/अरविंद