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छतरपुर, 16 जनवरी (हि.स.)। राम मंदिर अयोध्या में भगवान राम के दिव्य और भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए छतरपुर से तीन संतों को निमंत्रण प्राप्त हुआ हैँ। इनमें वात्सल्य ग्राम सिजई से साध्वी ऋतंभरा, बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री और महंत भगवानदास ऋंगारी महाराज का नाम शमिल है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक इन तीनों संतों का जुडाव सीधे तौर पर राम मंदिर आंदोलन से रहा है। साध्वी ऋतंभरा के गुरू स्वामी परमानंद जी महाराज की जन्म स्थली ग्राम सिजई लवकुशनगर में साध्वी ऋतंभरा द्धारा मध्यप्रदेश का एक मात्र मानवतादी सामाजिक प्रकल्प वात्सल्य ग्राम संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा मथुरा- वृन्दावन सहित देश अन्य अन्य प्रदेशों में वात्सल्य ग्राम संचालित किए जा रहे हैं।साध्वी ऋतंभरा के बाद दूसरा नाम छतरपुर से नाता रखने वाले बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का है जो भगवान हनुमान की कृपा से लोगों की मन की बात और समस्याओं को जानकार विपत्तियाें का निराकरण करने के लिए देश दुनिया में ख्याति प्राप्त कर चुके हैं। इनके द्धारा ग्राम गढा बागेश्वरधाम में कैंसर अस्पताल सहित कई मानवतावादी सामाजिक प्रकल्प संचालित करने की तैयारी की जा रही है। तीसरे संत का नाम महंत भगवानदास ऋंगारी महाराज है जो 1990 में राममंदिर आंदोलन से जमीनी स्तर से जुडे रहे हैं।महंत भगवानदास ऋंगारी महाराज चित्रकूट के भगवान कामतानाथ मंदिर प्रबंधन के प्रमुख हैं तथा अयोध्याधाम में भी निमोही अखाडा परिषद के कार्यकारी मण्डल में दायित्वान पदाधिकारी रहे हैं।
महंत भगवानदास ऋंगारी महाराज से जब अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बारे में बात की गई तो उन्होंने भावुक होकर बताया कि सन् 1990 में राम मंदिर आंदोलन के कारण मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के जिलों की बार्डर सील कर दी गई थी। तब मेरे साथ छतरपुर के पहाडगांव निवासी रामपाल ठाकुर, संकट मोचन के जगदीश खटीक , बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के दादा जी पंडित सेतूलाल गर्ग और साध्वी सुश्री उमा भारती मौजूद थी। चित्रकूट के पहले उमा भारती पिछड गई और हमारी टीम प्रशासन से जूझते हुए अयोध्या की ओर बढती गई। नम आखों के साथ उन्होंने आगे बताया कि मुलायम सिंह सरकार में संतों और राम भक्तों के साथ अत्याचार किया गया था। सडकें राम भक्तों के रक्त से रक्त रंजित थी। सरयू के पानी में रक्त के रंग की लालामी दिख रही थी। पूरा परिदृश्य भयावह और खौफनाक था। महंत भगवानदास ऋंगारी महाराज ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन का चित्रण बेहद पीडादायक रहा है लेकिन 22 जनवरी 2024 राम भक्तों के लिए उतनी ही महात्वपूर्ण तिथि है जितनी लंका में असत्य पर सत्य की जीत पाने के बाद भगवान प्रभु अजानभुज सरकार वापिस अयोध्या लौटे थे। उन्होंने सभी से आग्रह किया है कि अब दुनिया में सनातनी एक दीवाली नहीं अपितु 22 जनवरी से दो दीवाली मनाएंगे। राम मंदिर आंदोलन भी असत्य पर सत्य की जीत है। सभी सनातनी घरों की स्वच्छता करें, रगोली बनाएं और घर में दीप यज्ञ करके खुशियां मनाकर फल मिठाईयां से भगवान राम को प्रसाद चढाकर मुंह मीठा करें।
महंत भगवानदास ऋंगारी महाराज ने कहा नें राम मंदिर अयोध्या जाने का निमंत्रण मिलना मेरे लिए सौभाग्य है। देश के संतों और शंकराचार्यों को किसी प्रकार का विरोधाभास नहीं करना चाहिए ना ही राम मंदिर अयोध्या जाने का निमंत्रण अस्वीकार करना चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार/सौरभ भटनागर