[ad_1]




मुरादाबाद, 06 जनवरी (हि.स.)। अयोध्या में भगवान श्री राम का प्राकट्य इस सदी का सबसे बड़ा आयोजन एवं आध्यात्मिक सुअवसर है। पांच सौ वर्षों के बलिदानों एवं त्याग के पश्चात हम भव्य राम मंदिर के दर्शन के साक्षी बनने जा रहे हैं। आज भगवान की प्रसन्नता के लिए बधाई एवं मंगलगीत गाये गये। यह लाइनें मुरादाबाद के बुद्धि विहार में शनिवार को भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा समारोह की खुशी में आयोजित भजन संध्या में कथा व्यास धीरशांत दास अर्द्धमौनी ने कही।
धीरशांत दास अर्द्धमौनी ने कहा कि बुद्धिमान जानते है कि आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु हैं। मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र उसका परिश्रम होता है जो सदैव उसके साथ रहता है। इसलिए परिश्रमी व्यक्ति कभी भी दुखी नहीं रहता है।
उन्होंने कहा कि भगवान की सेवा एवं आध्यात्मिक आनन्द ही अपना है बाकी सब कुछ यहीं छोड़ जाना है। इसलिए ऐसा धन मत कमाओ जिसमें गरीब तबाह होते हों, उनके मुंह का रूखा-सूखा टुकड़ा छीनता हो, उनके बाल-बच्चों का जीवन बिगड़ता हो, उनका भविष्य अन्धकारमय बन जाता हो। धन तो चला ही जायगा, गरीबों का दारुण दुःख, उनका आर्तनाद, उनकी सन्ताप-ज्वाला प्रलयाग्नि बनकर तुम्हारे सुख के नगर को भस्मीभूत कर डालेगी।
हिन्दुस्थान समाचार/निमित जायसवाल/राजेश
[ad_2]
Source link