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मंडी, 16 फरवरी (हि. स.)। मज़दूर संगठनों के राष्ट्रीय आह्वान पर आज मंडी में मज़दूरों ने पड्डल मैदान से बाज़ार होते हुए उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली और मोदी सरकार के खि़लाफ़ जोरदार प्रदर्शन किया। जिसमें किसान सभा,महिला समिति, नौंजवान सभा,एसएफआई और एचपीएमआरए ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।
इस मौके पर भूपेंद्र सिंह ने बताया कि आज की हड़ताल का मु य आह्वान मोदी सरकार की मज़दूर विरोधी नीतियों का विरोध करना, बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने के अलावा श्रम कानूनों को रद्द करने के फ़ैसले को वापिस लेना है। इसके अलावा किसानों की फसलों के लिए एमएसपी लागू करना और नए बिजली विधेयक को रद्द करवाना है।
भूपेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार आंगनवाड़ी व मिड डे मील कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित नहीं कर रही है और न ही उन्हें न्यूनतम वेतन दे रही है। इसी प्रकार सरकार ने मनरेगा के लिए बजट ज़रूरत से आधा ही रखा है। जिसके कारण कहीं पर भी मज़दूरों को सौ दिनों का रोजग़ार नहीं मिल रहा है। यही नहीं केंद्र सरकार मनरेगा मज़दूरों को मात्र 212 रु दिहाड़ी ही अदा कर रही है। सरकार ने रेहड़ी फहड़ी वालों के अधिकार के लिए 2014 में बने स्ट्रीट वेंडरज क़ानून को भी रद्द करने का निर्णय लिया है जिससे इनके रोजगार की गारंटी समाप्त हो जाएगी। मोदी सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अपने पूंजीपति दोस्तों को कौडिय़ों के भाव बेच रही है और सामाजिक सुरक्षा के लिए बने क़ानून निरस्त करने में लगी है। इसलिए मज़दूर आने वाले लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार को सत्ता में न आने के लिए काम करेंगे।
हिमाचल किसान सभा के कुशाल भारद्धाज ने कहा कि पिछले किसानों के 376 दिल्ली घेराव के बाद तीन काले कृषि क़ानून तो निरस्त कर दिए थे। लेकिन उन्हें एमएसपी की गारंटी देने बारे दिए आश्वाशन को अभी तक भी लागू नहीं किया है और अब जब किसानों ने 13 फऱवरी से दोबारा दिल्ली मार्च शुरू किया है तो उन्हें रोकने के लिए सड़कों पर कीलें गाड़ दी है और उनपर लाठीचार्ज और आँशु गैस के गोले दागे जा रहे हैं। वहीं सुरेश सरवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने देश में 5 करोड़ युवाओं को रोजग़ार देने का वादा किया था लेकिन रोजग़ार के बजाय युवाओं का ध्यान मंदिर-मस्जिद औऱ हिंदू-मुस्लिम के काल्पनिक विवाद में भटकाया जा रहा है
हिन्दुस्थान समाचार/मुरारी/सुनील