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-स्टार्टअप अनलॉकिंग द इनफिनिटी पोटेंशियल विषय पर सेमिनार का आयोजन
गांधीनगर, 11 जनवरी (हि.स.)। वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2024 के दूसरे दिन गुरुवार को उद्योग मंत्री बळवंतसिंह राजपूत की उपस्थिति में “स्टार्टअप अनलॉकिंग द इनफिनिटी पोटेंशियल” विषय पर सेमिनार आयोजित हुआ। सेमिनार में राजपूत ने कहा कि गुजरात में चार हजार से अधिक महिला उद्यमी हैं। गुजरात में स्टार्टअप को लेकर उदार नीति के कारण अब तक 900 से अधिक पेटेंट दिए गए हैं।
इस अवसर पर केन्द्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव राजेश कुमार सिंह ने स्टार्टअप की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य के स्कूलों में आई-हब के माध्यम से स्टार्टअप की शुरुआत की गई है, इसके लिए एक करोड़ रुपये का फंड आरक्षित रखा गया है। वर्ष 2020 के बाद नई नीति से ग्रामीण क्षेत्र में पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। भारत स्टार्टअप क्षेत्र में विश्व का तीसरा देश बन गया है। केन्द्र सरकार का उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग समग्र स्टार्टअप इकोसिस्टम का रखरखाव करता है। उन्होंने कहा कि हमारे विभाग द्वारा वर्ष 2016 में स्टार्टअप इंडिया मिशन शुरू किया गया था। आज 915 स्टार्टअप को 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि दी गई है। स्टार्टअप इंडिया के लिए 700 करोड़ रुपये की सीड फंड योजना भी लागू की गई है।
अब तक 21 हजार से अधिक डीपीआईए मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं तथा जीईएम (जेम) पोर्टल पर ऑनबोर्ड हुए हैं और अब तक 17 हजार करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के 2 लाख से अधिक वर्क ऑर्डर मिले हैं। स्टार्टअप की सरलता के लिए बैंकों, वित्तीय कंपनियों तथा एआईएफ द्वारा क्रेडिट गारंटी प्रदान की जा रही है। स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिए केन्द्र सरकार अब स्टार्टअप्स के लिए अलग कोष के साथ एक अलग डीप टेक स्टार्टअप नीति पर कार्य कर रही है। स्टार्टअप के कारण रक्षा क्षेत्र में नौसेना को बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिल रहे हैं।
आई क्रिएट के सीईओ अविनाश पुणेकर ने स्टार्टअप के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश में 1990 के अंत तक स्टार्टअप की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सके, इतनी ही थी। इसमें पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। देश में इकोसिस्टम के अनुकूल माहौल के फलस्वरूप भारत स्टार्टअप में तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम हब बना है। इंडस्ट्रीज के सपोर्ट से उभरते स्टार्टअप में नए प्राणों का संचार हो रहा है। देश में स्टार्टअप के लिए गुजरात ने सर्वप्रथम स्टार्टअप पॉलिसी लागू की है। राज्य सरकार द्वारा स्टार्टअप को सपोर्ट किए जाने से गुजरात लगातार तीन वर्षों से इस मामले में शीर्ष पर है। गुजरात ने ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में विशिष्ट स्थान प्राप्त किया है। जय याज्ञिक ने स्टार्टअप में नए ट्रेंड्स की जानकारी देते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी के युग में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तथा जनरल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस विशेष महत्वपूर्ण क्षेत्र बन कर उभर आए हैं। आने वाले वर्षों में आई की मांग बढ़ेगी और वह हर सेक्टर में कार्यक्षमता के अनुसार उपयोगी सिद्ध होगा। आज के जमाने में जनरल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एक नया ट्रेंड बन गया है। आई-हब के सीईओ हिरन्मय महंता ने कहा कि गुजरात ने स्टार्टअप क्षेत्र में काफी उन्नति की है। 2015 में राज्य में केवल 25 स्टार्टअप थे, जो आज बढ़कर 9 हजार से अधिक हो गए हैं और वे सभी कार्यरत हैं। गुजरात में पांच यूनिकॉर्न कंपनियां शुरू हो गई हैं। 3एम-मनी, मार्केट तथा मेंटोर की पॉलिसी पर गुजरात सरकार की स्टार्टअप पॉलिसी कार्य कर रही है।
सेमिनार में ‘स्टार्टअप किस प्रकार भारत देश को मजबूत तथा आत्मनिर्भर राष्ट्र बना सकता है’ विषय पर ओपन डायलॉग आयोजित हुआ। इसमें पैनलिस्ट के रूप में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव संजीव आईआरएस, स्विट्जरलैंड जेपीईजी कन्वीनर प्रो. डॉ. तौउरद इब्राहीमी, जेपीईजी कन्वीनर, यूनाइटेड स्टेट्स-आईबीएम सुरक्षा विशेषज्ञ लैब्स के कृष्ण येलेपेडी, यूनाइटेड स्टेट्स के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. पीयूष देसाई, पोर्टलैंड के क्लार्कविस्ट ग्रेगरी मौरर, नीति आयोग तथा अध्यक्ष एवं मिशन डायरेक्टर, अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) के डॉ. चिंतन वैष्णव शामिल हुए। इस अवसर पर राज्य सरकार के एडीशनल इंडस्ट्रीज़ कमिश्नर (आईएएस) कुलदीप आर्य तथा जीएमडीसी के प्रबंध निदेशक रूपवंत सिंह, बड़ी संख्या में विद्यार्थी और उद्यमी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार/ बिनोद/प्रभात
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