Warning: Undefined array key "mode" in /home/azaannews/public_html/wp-content/plugins/sitespeaker-widget/sitespeaker.php on line 13
[ad_1]

जम्मू, 25 जनवरी (हि.स.)। साहिब बंदगी के सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज ने आज पूर्णिमा के अवसर पर राँजड़ी में भव्य सत्संग के दौरान देश विदेश के कोने कोने से आए श्रद्धालुओं को सबसे पहले 75वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ दीं। अपने प्रवचनों की अमृत वर्षा से साहिब जी ने संगत को निहाल करते हुए कहा कि पहला योग ज्ञान है। सुमिरन से आपमें ज्ञान खुद-ब-खुद आ जायेगा। जप, तप, संयम, साधना सब सुमिरन से आ जायेंगे। ज्ञान आ जायेगा तो उचित अनुचित सब समझ आ जायेगा। किसी से ईर्ष्या मत रखो। जब हरेक में आत्मा देखोगे तो समझ में आ जायेगा कि यह सब मन का खेल है। जब आप अपने मन को पकड़ लेंगे तो किसी से राग बनेगा नहीं। दूसरा योग विचार है। जब विचार आयेगा तो सोचकर तो देखो कि एक दिन दुनिया से जाना है। जब यह विचार आयेगा तो आपका आधा मोह दुनिया से समाप्त हो जायेगा। तीसरा योग विवेक है। यह गहन चिंतन है। यह संसार कर्म भूमि है। सबको अपने किये का फल भोगना है। यह विवेक आ जायेगा तो बात ही खत्म है। बाकी सब भोग लोक है।
इसी संसार से कर्म करके मनुष्य स्वर्ग लोक की प्राप्ति करता है। सन्यासी ब्रह्म की प्राप्ति करता है। महान कर्म करके देवत्व की प्राप्ति करता है। गुरु भक्त लोग नाम की प्राप्ति करके अमर लोक की प्राप्ति करते हैं। पापी पाप करके नरक की प्राप्ति करते हैं। यह संसार कर्म भूमि है। यहाँ हरेक कर्म विवेक करके करना है। चौथा योग शील है। भरत बहुत शील थे। शील वो है, जो किसी का कभी अपमान न करे। कुछ लोग उदंड होते हैं। किसी का भी फौरन से अपमान कर देते हैं। आप थोड़ा सा विचार करना कि जैसा अपने प्रति व्यवहार नहीं चाहते, दूसरे से भी नहीं करना। अगर किसी से विचार नहीं मिल रहा तो अपना देख। उसकी निंदा क्यों करनी। शील आदमी किसी का अपमान नहीं करता है।
हिन्दुस्थान समाचार/राहुल/बलवान