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जम्मू, 20 फ़रवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) श्रीनगर में मंगलवार को 3डी प्रिंटिंग हैंड-ऑन ट्रेनिंग पर ‘उन्नत उद्यमिता और कौशल विकास कार्यक्रम (ए-ईएसडीपी)’ पर एक सप्ताह की कार्यशाला शुरू हुई। कार्यशाला इनोवेशन इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेंटर (आईआईईडीसी) द्वारा आयोजित की जाती है और ईएसडीपी योजना के तहत भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय द्वारा प्रायोजित है।
एनआईटी श्रीनगर के निदेशक प्रो. ए. रविंदर नाथ कार्यशाला के संरक्षक हैं। उन्होंने इस कार्यशाला की मेजबानी में आयोजकों के प्रयासों की सराहना की और सभी प्रतिभागियों को अपनी शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य आरईसी श्रीनगर; प्रो.अली मोहम्मद भट, जो कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे, ने की। इस अवसर पर डीन फैकल्टी वेलफेयर प्रो. जी.ए. हरमैन, डीन एलुमनी एंड इंटरनेशनल अफेयर्स प्रो. नजीर अहमद शेख, डीन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट डॉ. यशवंत मेहता, हेड, आईआईईडी सेंटर डॉ. साद परवेज और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अपने मुख्य भाषण में, प्रोफेसर भट्ट ने उद्यमशीलता उद्यमों के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने में सावधानी और रणनीति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सभी उद्यमियों को अपने वित्तपोषण स्रोतों को चुनते समय सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि बैंक ऋण आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन किसी भी चूक को रोकने के लिए इन ऋणों को विवेकपूर्ण तरीके से प्रबंधित करना जरूरी है।
प्रोफेसर भट्ट ने युवा उद्यमियों को सलाह दी कि वे केवल वही ऋण लें जिसकी उन्हें वास्तव में आवश्यकता है। अपना खुद का पैसा पैदा करना और व्यवसाय चलाने के लिए ऋण पर बहुत अधिक निर्भर न रहना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वित्त के गलत प्रबंधन के कारण भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में कई कंपनियां धराशायी हो गईं। इस अवसर पर प्रोफेसर जी.ए. हरमैन ने एक विषय पर सप्ताह भर की कार्यशाला आयोजित करने के लिए प्रो. साद और डॉ. दिनेश को बधाई दी।
हिन्दुस्थान समाचार/राहुल/बलवान