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यही है सच्ची श्रद्धांजलि कि उनके सपनों को साकार होते देख रहा परिवार
जौनपुर,18 जनवरी (हि.स.)। अयोध्या श्रीराम जन्म भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमि पूजन और आगामी 22 जनवरी को रामलला की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा होने की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। ऐसे में यहां तक पहुंचने में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन चलाए गए आंदोलन में कई ऐसे नायक रहे जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। जिसमें एक नाम जनपद के खेतासराय कस्बे के सरपंच किशोरीलाल गुप्ता भी थे। जिन्होंने राममन्दिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और इसके लिए उन्हें जेल यातनाएं सहनी पड़ीं। आज परिवार बेहद खुश है कि पिता जी इस दुनिया में नहीं है लेकिन धर्म के प्रति उनकी त्याग और तपस्या का फल मिला है , जिसे करोड़ों देशवासी साक्षी बनने जा रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार से बात करते हुए सरपंच किरोशी लाल के बारे में उनके पुत्र डॉ. अमलेंद्र कुमार गुप्ता बताते हैं कि पिता एक व्यवसायी थे। धर्म के प्रति उनकी गहरी आस्था थी। हिन्दू जन जागरण के लिए समाज में अग्रणी भूमिका निभाते थे। उन्होंने अपने जीवन काल में कस्बे में नवरात्रि में लगने वाले दुर्गा पूजा पंडाल की शुरुआत सन 1980 में की थी। इसके अलावा नगर में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, सावन में कांवरिया शोभायात्रा, मानस सम्मेलन आदि की अगुवाई करते रहे। शुरू से ही वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे। श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन शुरू हुआ तो उसमें पिता जी जन जागरण कर अपने धर्म के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए आंदोलन में खेतासराय में नायक की भूमिका निभाई। जिससे तत्कालीन सरकार ने उनके ऊपर रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाकर कार्यवाही की । तत्कालीन सांसद राजा जौनपुर यादवेंद्र दत्त दुबे, तत्कालीन विधायक उमानाथ सिंह के साथ जेल में निरुद्ध रहे। जहाँ उन्होंने जेल की यातनाओं को झेला। उन्होंने अपना जीवन समाज के प्रति समर्पित कर दिया था। अफसोस इस बात का है कि यदि आज वे जीवित होते तो राममन्दिर की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा के साक्षी होते। उन्होंने बताया कि बीते 10 मार्च 2019 को पिता के स्वर्गवास होने के बाद से उनके नक्शे कदम पर चलकर समाज को एक नई ऊंचाइयों प्रदान करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होंगी। आज उन्हीं के नींव पर कस्बे में तमाम धार्मिक, सामाजिक संगठन संचालित हो रहे हैं।मुझे अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है कि 22 जनवरी को उनकी याद में उनका परिवार उनके सपनों का साक्षी बनने जा रहा है। श्री राम जन्मभूमि न्यास द्वारा मुझे मंदिर में 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा में आमंत्रण कार्ड मिलने के बाद अपार हर्ष और खुशी हो रही है जिसे मैं अपने शब्दों में बयां नहीं कर सकता । मेरे पिता के लिए यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि उन्हें मरने के बाद भी भगवान राम की कृपा से अयोध्या में आयोजित उत्सव में आमंत्रित किया गया है।
हिन्दुस्थान समाचार/विश्व प्रकाश/दिलीप/सियाराम