[ad_1]

खूंटी, 24 मार्च (हि.स.)। तोरपा प्रखंड के जिबलोंग में रविवार को सरना धर्म सोतोः समिति शाखा अरहरा के तत्वावधान में सरना झंडागड़ी सह सरना धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। अजय तोपनो, जोहान तोपनो व ग्रेस तोपनो की अगुवाई में अनुयायियों के साथ सरना स्थल में भगवान सिङबोंगा की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और खुशहाली की कामना की गई और विभिन्न मंडलियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सरना भजन प्रस्तुत कर भक्तिमय बनाया।
समारोह में मुख्य अथिति कें तौर पर धर्मगुरु बगरय मुंडा और विशिष्ट अथिति दुर्गा कच्छप उपस्थित थे। इस अवसर पर धर्मगुरु बगरय मुंडा ने अनुयायियों को संबोधित करते हुए कहा कि सिङबोंगा की स्तुति से हमारी आत्मा में भक्ति व श्रद्धा बढ़ती है तथा समाज में प्रेम व भाईचारा की भावना पनपती है। इससे लोभ, लालच व अहंकार जैसे बुराइयां दूर होती है और जीवन में सुख, शांति और खुशहाली आती है।
विशिष्ट अतिथि दुर्गा कच्छप ने कहा कि सरना प्रकृति पर आधारित विश्व का प्राचीनतम धर्म है।इसमें आज भी सच्चाई, अच्छाई, ईमानदारी व निष्ठा है परंतु धार्मिक प्रतिस्पर्द्धा में धीरे-धीरे अपनी मूल अस्तित्व व अस्मिता लुप्त होती जा रही है। इससे न केवल धार्मिक-सामाजिक व्यवस्था कमजोर हुई है, बल्कि जल-जंगल-जमीन से भी बेदखल होना पड़ रहा है। मानव जीवन के समुचित विकास कें लिए सरना धार्मिक-सामाजिक व्यवस्था का संरक्षण व संवर्धन जरूरी है।
हिन्दुस्थान समाचार/अनिल