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अयोध्या, 11 जनवरी (हि.स.)। 22 जनवरी 2024 एक ऐतिहासिक दिन बनने जा रहा है। यह अवसर, अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर में विग्रह की होने वाली प्राण प्रतिष्ठा का है। राम का जीवन इतना आदर्श और व्यापकता लिए है कि इसे देश की सीमाओं और भाषाओं या बोलियो के बंधन में नहीं बांधा जा सका। आज अयोध्या के राम, ‘सबके राम’ बन चुके हैं। अनेक देशों में होने वाली रामलीलाएं इसकी गवाही दे रहीं हैं।
दरअसल, राम का चरित्र एक आदर्श है। कोई समाज इसकी अनदेखी नहीं कर सकता। इनकी व्यापकता और स्वीकार्यता ने भाषा और मजहब की सारी दीवारों को तोड़ दिया है। यही वजह है कि आज देश और दुनिया के अनेक देशों में रामलीलाओं का मंचन होता है।
इन देशों में होती हैं रामलीलाएं
हिन्दी साहित्यकार और साहित्य भूषण से सम्मानित पूर्व डिप्टी एसपी प्रमोदकांत मिश्र बताते हैं कि 86 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया और अंग्रेजी भाषी त्रिनिडाड में भी रामलीला का मंचन होता है। बौद्धिस्ट देश श्रीलंका, थाइलैंड के आलावा रूस भी इसका अपवाद नहीं है। अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित माउंट मेडोना स्कूल में पिछले 40 वर्षों से जून के पहले सप्ताह में रामलीला का मंचन होता आ रहा है। आजादी के पहले पाकिस्तान स्थित करांची के रामबाग की रामलीला मशहूर रही लेकिन अब इसका नाम बदलकर आरामबाग कर दिया गया है और रामलीला होने से सदैव खिलखिलाने वाला मैदान कंक्रीट के जंगल के रूप उदास है। श्री मिश्र के मुताबिक मान्यता है कि भगवान राम, माता सीता के साथ शक्तिपीठ हिंगलाज जाते समय इस जगह विश्राम किया था।
हिन्दुस्थान समाचार/डॉ. आमोदकांत/दिलीप
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