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भागलपुर, 10 मार्च (हि.स.)। महिला दिवस सप्ताह के अवसर पर रविवार को परिधि द्वारा महिला चौपाल का आयोजन कला केंद्र में किया गया।
परिधि महिला चौपाल की अध्यक्षता संगीता ने तथा संचालन सुषमा ने किया। कार्यक्रम की शुरूआत परिधि मंडली द्वारा गाए गीत कैसा है चलन कैसी रीत है से हुई। पीस सेंटर परिधि द्वारा रखे गए विषय आजादी आंदोलन के मूल्य और महिला पर बात रखते हुए वक्ताओं ने कहा कि आजादी आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण मूल्य समता है।
सभी प्रकार की समता और विषमता एक दूसरे की पूरक हैं। समता एक विचार है अवधारणा है। ऐसा नहीं हो सकता कि हम दलितों अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का माने और महिला समता की बात करें। आजादी आंदोलन से ही हमारा संविधान निकला है और संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और महिला समता एक दूसरे की विपरीत है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का वह उदाहरण है जिससे लडकियों को पढ़ने, घूमने– फिरने और पहनने ओढ़ने की आजादी छीनी जाती है। समता और सशक्तिकरण दो अलग बातें हैं। ये बात सही है कि सशक्तिकरण से समता से आती है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सिविल सर्जन डॉ अंजना कुमारी ने सभी को महिला दिवस की बधाई देते हुए कहा कि महिला दिवस एक दिन की प्रक्रिया नहीं है, यह सामाजिक सांस्कृतिक बदलाव की प्रक्रिया है।
महिला दिवस एक निमित्त है। आज हम उन्हें संघर्षों को याद करते हैं। महिलाएं अपनी संघर्ष से आगे बढ़ी है। बाल विकास परियोजना पदाधिकारी श्रीमती चंचला कुमारी ने कहा कि हमारे संविधान ने हमें कुछ मौलिक अधिकार दिए हैं, यह मौलिक अधिकार हमें समानता के साथ जीने का अधिकार देता है। महिला चौपाल के मौके पर कई कवित्रियों ने अपनी रचना भी सुनाया। कविता, गीत और संवाद के बाद महिलाओं, युवतियों और किशोरियों ने कई प्रकार के खेलों का आनंद लिया। खेल की निर्णायक की भूमिका सीडीपीओ चंचल कुमारी और छाया पांडे ने निभाई।
हिन्दुस्थान समाचार/बिजय