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गांधीनगर, 24 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में बुधवार को गुजरात विधानसभा में ‘तेजस्विनी विधानसभा’ का आयोजन किया गया। गुजरात के विभिन्न विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं ने विधानसभा सदन में बैठ कर सदन के कामकाज का संचालन किया। गुजरात की बालिकाओं के लिए इस दिवस को यादगार बनाने और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और नेतृत्व कौशल के विकास की दिशा में गुजरात विधानसभा का यह अनोखा कदम है।
इस अवसर पर गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष शंकर भाई चौधरी ने कहा कि आज गुजरात की बेटियों ने जिस आत्मविश्वास के साथ विधानसभा सदन का संचालन किया, उसे देखकर निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि गुजरात का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। राज्य का दृश्य बदल गया है, अगर गुजरात के हर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व ऐसी तेजस्वी बेटियों के हाथ में जाएगा तो गुजरात के विकास को कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि छात्राएं विधानसभा सदन में बैठकर और इसका संचालन कर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर सकती हैं और लोकतान्त्रिक प्रणाली जनहितकारी बने इस हेतु यह कार्यक्रम वास्तव में सराहना का पात्र है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि एक समय था देश में सती प्रथा के विरुद्ध राजा राममोहन राय ने अभियान चलाया और भारत में महिला सशक्तिकरण की शुरुआत की। पहले गुजरात में भी बेटा-बेटी के जन्मदर में अंतर था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेटा-बेटी की जन्मदर को बढ़ाने के लिए जन जागरूकता अभियान शुरू किया और गुजरात को इस स्थिति से बाहर निकालने का काम किया।
प्रधानमंत्री ने महिला शक्ति को स्थापित होने के अनेक अवसर दिए: भूपेंद्र पटेल
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिला शक्ति को नये युग की शक्ति के रूप में स्थापित होने के अनेक अवसर दिये हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर गुजरात ने विधानसभा भवन में ‘तेजस्विनी विधानसभा’ और जिला पंचायत और नगरपालिका स्तर पर ‘तेजस्विनी पंचायत’ कार्यक्रम के माध्यम से राज्यव्यापी उत्सव नई पहल की गई है। यह ‘तेजस्विनी विधानसभा’ राजनीतिक लोकतंत्र से लेकर सामाजिक लोकतंत्र का संदेश देगी। उन्होंने बालिकाओं से सामाजिक लोकतंत्र के साथ-साथ गुजरात के समग्र विकास की यात्रा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने मॉक विधानसभा ‘तेजस्विनी विधानसभा’ को गुजरात विधानसभा के लिए एक ऐतिहासिक घटना बताते हुए कहा कि आज की तेजस्विनी विधानसभा में बालिकाओं द्वारा सदन के संचालन को देखकर मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि गुजरात की बेटियाँ न केवल घर संभाल रही हैं बल्कि गांव, शहर, नगर पंचायत या जिले के शासन की कमान भी संभाल रही हैं, इस तरह वह भविष्य में भी वे जनता का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य और देश का प्रतिनिधित्व करेंगी।
महिला एवं बाल कल्याण मंत्री भानुबेन बाबरिया ने कहा कि गुजरात विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने 13 बालिका पंचायतों, अहमदाबाद समरस छात्रावास सहित विभिन्न ज़िलों से बेटियों का चयन किया था। आज गुजरात की इन बेटियों ने महिला सशक्तिकरण का श्रेष्ठ उदाहरण पेश किया है।
तेजस्विनी विधानसभा में प्रश्नोत्तरी काल के दौरान बालिकाओं से संबंधित विभिन्न मुद्दों जैसे शिशु जन्म, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा, सुरक्षा और नेतृत्व विकास पर चर्चा की गई। इसके अलावा जन प्रतिनिधित्व के लिए महिला आरक्षण संबंधी विधेयक भी प्रस्तुत किया गया और तेजस्विनी द्वारा इस विधेयक पर चर्चा की गई।
उल्लेखनीय है कि 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में मनाया जाता है। बालिकाओं के लिए इस दिन को और खास बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग तथा गणेश वासुदेव मावलंकर संसदीय अध्ययन एवं प्रशिक्षण ब्यूरो व गुजरात विधानसभा के संयुक्त उपक्रम से ‘राष्ट्रीय बालिका दिवस’ के अवसर पर विधानसभा में इस ‘तेजस्विनी विधानसभा’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बालिका पंचायत का प्रतीक चिह्न और उसकी मार्गदर्शिका का अनावरण किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार/ विनोद/संजीव