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मथुरा, 15 फरवरी(हि.स.)। ब्रज की हर एक वस्तु और हर एक वृक्ष को संग्रहित करने की आवश्यकता है। आप सभी ब्रजवासियों के कारण यह एक अच्छी शुरूआत है। भगवान श्री कृष्ण ने हमें चैतन्य रूप में इसे व्यवस्थित करने के लिए अवसर प्रदान किया है। हमें अपने आपको चैतन्य रूप में ही समाहित करके इस पुनीत कार्य को करना चाहिए।
यह बातें गुरुवार को ब्रज लोक कला एवं शिल्प संग्रहालय का लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करते हुए उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद् के उपाध्यक्ष शैलजाकान्त मिश्र ने कही।
उन्होंने कहा ब्रज के समग्र विकास के लिए ब्रज तीर्थ विकास परिषद् की स्थापना का संकल्प ब्रह्मर्षि देवरहा बाबा के आदेश पर हुआ। उनका आदेश था कि ब्रज की रक्षा के लिए कार्य करना होगा। तभी भारत सम्पूर्ण विश्व में सिरमौर बनेगा। मैं हमेशा उनके आदेश को अपने स्मरण में रखकर ब्रज की सेवा में लगा हुआ हूं।
उन्होंने कहा कि लोक कला एवं शिल्प संग्रहालय पूर्व में भी बना। बज्रनाभ जी ने समूचे ब्रज क्षेत्र को ही संग्रहालय बना दिया था, जो किन्हीं कारणों से लोप हो गया था। ब्रज की लोककला में ब्रज के लोक गीतों में चेतना समाई हुई है। श्री कृष्ण कालीन चेतना उनका रूप उनके शब्द समाए हुए हैं। मोदी और योगी के अनुग्रह से कुछ विकास धरातल पर है। कुछ योजनाएं आने वाली है, उन्होंने कहा कि धन खर्च करके ब्रज को सिंगापुर तो बनाया जा सकता है, किन्तु तीर्थ नहीं बनाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि ब्रज लोक कला एवं शिल्प संग्रहालय में जो संग्रह किया जा रहा है, उससे भी आगे श्री कृष्ण के प्रति भाव को अपने हृदय में संग्रहित करने की आवश्यकता है, तब ही तीर्थ की स्थापना सम्भव हो सकेगी। सभी ब्रजवासी व उनके माध्यम से यहां आने वाले लोगों के मन में भगवान श्रीकृष्ण की सत्य निष्ठा, उनका सद्भाव को अपने अन्दर समाहित करना होगा।
हिन्दुस्थान समाचार/महेश/राजेश