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मुरैना, 05 मार्च (हि.स.)। जिले के बानमोर थाना क्षेत्र के सिकरोड़ी गांव में सोमवार-मंगलवार की दरिम्यानी रात राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत हो गई। गांव में एक ही स्थान पर दर्जनभर से अधिक मोर मृत मिलीं थीं। इतनी अधिक संख्या में मोरों के मरने की जानकारी ग्रामीणों ने पुलिस को दी। जिसके बाद पुलिस ने वन विभाग को सूचना दी। वन विभाग के अमले ने मौके पर पहुंचकर वहां से 14 मृत मोरों को जप्त कर शवों को पोस्ट मार्टम के लिए भेजा। उधर मौके से तीन मोर बेहोश हालात में मिलीं। जिनका उपचार जिला पशु अस्पताल में चल रहा है, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है। मोरों की मौत की वजह पेट में संक्रमण सामने आ रहा है।
सिकरोड़ी गांव में मंगलवार की सुबह एक खेत में 14 मोर मृत अवस्था में मिलीं। ग्रामीणों ने जब इतनी अधिक संख्या में मृत मोर देखीं तो उन्होंने इस बात की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने वन विभाग को जानकारी दी। जिसके बाद रेंजर श्वेता त्रिपाठी मौके पर पहुंची। तत्पश्चात सभी 14 मृत और 3 बीमार मोरों को लेकर बानमोर पशु अस्पताल लाया गया। जहां पशु चिकित्सक डॉ अनिल सोलंकी ने मोरों का पोस्ट मार्टम किया। उधर तीन बीमार मोर को उपचार के लिए मुरैना स्थित जिला पशु अस्पताल भेज गया।
उधर मोरों की मौत का कारण पेट में संक्रमण होना बताया जा रहा है। यह संक्रमण दूषित पानी या खाने से हो सकता है। इस मामले में सबसे खास बात यह है कि राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत को लेकर वन विभाग की रेंजर श्वेता त्रिपाठी कतई गंभीर नहीं है। सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत के बाद उनका पोस्टमार्टम कराया गया था। उसके बाद उनका अंतिम संस्कार वन विभाग के आरक्षकों के द्वारा शनिश्चरा क्षेत्र में किया गया था। जबकि मौके पर वरिष्ठ अधिकारीयों को मौजूद होना चाहिए था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत मोरों की मौत का खुलासा किया जाएगा।
खासबात यह है कि जब इतनी अधिक संख्या में मोरों के मरने के कारणों की जानकारी लेने के लिए वन विभाग की रेंजर स्वेता त्रिपाठी को कॉल किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव ही नहीं किया। कॉल रिसीव न करने से पता चलता है कि वन विभाग के अधिकारी अपने कर्तव्य के प्रति कितने लापरवाह हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/शरद/मुकेश