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अयोध्या, 25 जनवरी (हि.स.)। महाराष्ट्र के नागपुर से कलाकारों ने गुरुवार को राम जन्मभूमि परिसर पहुंचकर रामलला के समक्ष ढोल व ताशे के साथ शिव गर्जना की। कलाकारों ने भगवा पोशाक में अपने-अपने वाद्ययंत्रों को बजाते हुए कारसेवकपुरम से शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा में सबसे आगे भगवा झण्डा लिए कलाकारों की टोली थी जो वादन के साथ-साथ झण्डे को लहालहाते हुए चल रहे थे। शिव गर्जना की टोली जब राम जन्मभूमि परिसर पहुंची तो उनका उत्साह चरम पर था।
कलाकारों ने रामलला के समक्ष पहुंचकर पारम्परिक ताल शैली में शिव गर्जना की प्रस्तुति की। वैसे यह आयोजन 22 जनवरी को होना था लेकिन प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के नाते उस दिन यह प्रस्तुति नहीं हो पायी थी। इन कलाकारों को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आमंत्रित किया गया था। शिव गर्जना की ताल शैली को बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न माना जाता है।
ग्रुप के सदस्य प्रतीक के अनुसार यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है हमें रामलला के समक्ष प्रदर्शन का हमें अवसर मिला। इसके लिए हम ट्रस्ट के आभारी हैं। उन्होंने बताया कि ढोल ताशा एक मराठी लोक परम्परा है। जिसमें ड्रम, झांझ, शंख, घण्टे और भगवा झण्डे शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में गणेश उत्सव के मौके पर सभी पण्डालों में शिव गर्जना होती है।
हिन्दुस्थान समाचार/बृजनन्दन
/राजेश