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जींद, 21 मार्च (हि.स.)। युवा किसान नेता अक्षय नरवाल, गांव कथूरा सोनीपत निवासी प्रवीन, गांव कोयल निवासी वीरेंद्र को जिला एवं सत्र अदालत से गुरुवार को जमानत की मंजूरी मिल गई है। तीनों को पंजाब बॉर्डर पर गत 13 फरवरी को किसानों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष के दौरान दर्ज मुकद्में में गिरफ्तार किया गया था। तीनों को 37 दिन बाद जमानत मिली है।
पिछले तीन दिनों से जेल के अंदर अनशन पर बैठे अक्षय नरवाल ने गुरुवार को जमानत मिलने के बाद शाम साढ़े छह बजे बाहर आकर अनशन तोड़ा। बाहर किसान नेताओं ने उन्हें जूस पिला कर अनशन खत्म करवाया। किसानों ने कहा कि हकों के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी। किसानों के अधिवक्ता सोमदत्त रेढू ने बताया कि तीनों किसान नेताओं को 13 फरवरी को दाता सिंह वाला बॉर्डर से गिरफ्तार गया था और उन पर हत्या के प्रयास सहित 11 अलग-अलग धाराओं में शामिल किया गया था।
गत 13 फरवरी को दातासिंह वाला बॉर्डर पर अक्षय नरवाल समेत चार किसानों के खिलाफ पुलिस ने हत्या के प्रयास सहित कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद अक्षय नरवाल को गिरफ्तार कर लिया था। अक्षय नरवाल की रिहाई की मांग को लेकर सात मार्च को किसानों ने जींद में धरना भी दिया था। इसके बाद पुलिस ने आश्वासन दिया था कि अक्षय नरवाल की जमानत हो जाएगी लेकिन जमानत नहीं हो पाई। चार दिन पहले अक्षय नरवाल ने जेल में अनशन शुरू कर दिया था।
युवा किसान नेता अक्षय नरवाल ने कहा कि वह निर्दोष हैं, और उसके खिलाफ बॉर्डर पर कोई सबूत नहीं मिले है। इसके बावजूद भी उनके खिलाफ संगीन धाराएं लगा कर गिरफ्तार किया गया। सरकार ने मौलिक अधिकारों का हनन किया है। वहीं प्रियंका खरकरामजी और संदीप चहल ने बताया कि प्रशासन की तरफ से उन्हें आश्वासन मिला है कि कुछ तारीखों पर पेशी भुगतने के बाद उनका केस खारिज करवाने का प्रयास रहेगा।
हिन्दुस्थान समाचार/ विजेंद्र/संजीव