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भोपाल, 15 फरवरी (हि.स.)। इंदौर में महिला द्वारा अपने ही बच्चों से भीख मंगवाकर लाखों रुपये कमाने के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने प्रदेश सरकार की मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है। आयोग ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि भिक्षावृत्ति विरोधी कानून को सख्ती से लागू करने के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए राज्य सरकार ने क्या कार्रवाई की है?
एनएचआरसी ने जेजे एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों को दी जाने वाली देखभाल सहित मामले में चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है। साथ ही कहा कि महिला कथित तौर पर बार-बार अपराध करने वाली है, जो दर्शाता है कि संबंधित अधिकारी सतर्क नहीं हैं, जिसके कारण छोटे बच्चे उनके परिवार के सदस्यों द्वारा भी उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। जिस उम्र में बच्चों को स्कूल जाना होता है, वे जीवन जीने के लिए अनैतिक तरीके अपनाने के लिए मजबूर होते हैं।
आयोग ने यह भी पूछा है कि राज्य सरकार ने भिखारियों की संख्या, उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई और पुनर्वास के लिए क्या कदम उठाए हैं। क्या इसके लिए सरकार द्वारा हाल ही में कोई सर्वेक्षण किया गया है। आयोग ने प्रदेश में मप्र भिक्षावृत्ति निवारण अधिनियम 1973 को सख्ती से लागू करने की जरूरत भी बताई ताकि बच्चे असामाजिक तत्वों का आसान शिकार न बन सकें।
ये है पूरा मामला
राजस्थान के बारा जिले के गांव कलमांडा की रहने वाली महिला पिछले आठ साल से इंदौर में अपने पति, बच्चों के साथ भिक्षावृत्ति कर रही थी। इस महिला के साथ इसके गांव के करीब 150 लोग आए थे, जिसमें इनकी बहन व जीजा शामिल थे। वे इंदौर के लवकुश चौराहे पर उज्जैन जाने व आने वाली कार व अन्य वाहनों से भीख मांगते थे। कथित तौर पर महिला अपने बच्चों को महाकाल मंदिर की ओर जाने वाले विभिन्न स्थानों पर भीख मांगने के लिए मजबूर कर रही थी। ये इस चौराहे के पास ही डेरा डालकर रहते थे। महिला खुद को लाचार बताने के लिए बैशाखी का सहारा लेकर भीख मांगती थी। जब उसे पकड़ा जाता था तो वह बैशाखी छोड़कर भाग जाती थी। जब कभी भी प्रशासन की कार्रवाई होती है तो ये एक या दो दिन के लिए छिप जाते थे और भीख मांगने नहीं जाते थे। इस महिला ने 45 दिन में अकेले भीख मांगकर ढाई लाख रुपये जमा किए थे। इसमें 50 हजार रुपये की एफडी बेटे के नाम पर की थी। एक लाख रुपये गांव में रह रहे अपने सास-ससुर को भेजी थी।
महिला एवं बाल विकास विभाग व एक संस्था (प्रवेश) के सदस्यों ने गत सात फरवरी को महिला को इंदौर के लवकुश चौराहे पर भीख मांगने दौरान रेस्क्यू किया। इसके साथ एक बेटी व पति के साथ दो बच्चे थे। पति अब बच्चों को लेकर राजस्थान अपने गांव चला गया है। इस महिला को रेस्क्यू के बाद परदेशीपुरा स्थित भिक्षुक पुनर्वास केंद्र पर रखा गया। वहां इसकी काउंसलिंग की गई। महिला के साथ उसकी आठ साल की बच्ची की भी काउंसलिंग की गई तो उसने बताया कि मां ही भीख मंगवाती थी। इस पर भीख मांगने वाली महिला के विरुद्ध जस्टिस जुवेनाइल एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए बाणगंगा पुलिस थाने में 12 फरवरी को केस दर्ज हुआ और उसके बाद उसे जिला जेल में भेजा गया है। वहीं उसकी सात साल की बेटी को अधिकारियों ने एक एनजीओ की देखभाल में लगा दिया है।
हिन्दुस्थान समाचा / मुकेश