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मंडी, 05 मार्च (हि.स.)। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के पूर्व अधिकारी एवं राज्य निवार्ण बोर्ड के संयोजक आपी शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश भी पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर नशे की चपेट में युवा वर्ग तेजी से आ रहा है। जिसे रोकने के लिए सरकार और समाज को सामुहिक प्रयास करने होंगे। यहां पत्रकारों से बात करते हुए ओपी शर्मा ने कहा कि प्रदेश में नशे के इस मकडज़ाल को तोडऩे के लिए करीब सौ करोड़ रूपए की लागत से राज्य एंटिनारकोटिक्स टास्क फोर्स को सुदृढ़ करते हुए इसमें ढाई सौ के करीब प्रशिक्षित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की आवश्यक्ता है। जिन्हें कमांडो प्रशिक्षण देकर नशा माफिया के खिालाफ तैयार करना होगा।
उन्होंने बताया कि हिमाचल का कोई भी हिस्सा नशे की हद से अछूता नहीं रहा है। भांग अफीम से आगे अब युवा पीढ़ी चिट्टा और अन्य घातक नशे की आदी हो रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन की तर्ज पर हिमाचल में भी नशे का कारोबार पनप रहा है। जबकि सरकार का नशा निवार्ण बोर्ड एक तरह से पंगु बनाकर रख दिया गया। उन्होंने कहा कि उनके नशा निवार्ण बोर्ड के संयोजक एवं सलाहकार रहते हुए जो एकीकृत नशा निवारण नीति बनाई गई थी उसे लागू ही नहीं किया जा सका है।
ओपी शर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे से राज्य में चिट्टे का कारोबार इतना बढ़ गया है कि इससे आने वाली पीढ़ी बर्बाद हो रही है। उन्होंने बताया कि अकेले मंडी शहर में ही चार से आठ करोड़ का चिट्टा बिक रहा है। जबकि सुंदरनगर में तो स्थिति इससे भी भयावह है, यहां पंद्रह मिनट में ही तीन करोड़ रूपए का चिट्टा बिक जाता है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एक और नशा आने वाला है जो चिट्टे से पचास से सौ गुणा ज्यादा घातक है। उन्होंने बताया कि नशे का यह नेटवर्क इतना व्यापक हो गया है कि नशाखोरों के लिए घर-घार तक सप्लाई हो रही है । हालांकि, पुलिस अपने स्तर पर कार्य कर रही है और बड़-बड़े मामले भी सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद नशाखोरी के खिलाफ पूरे समाज को जागरूक करते हुए सामुहिक लड़ाई लडऩी होगी। नशा निवार्ण अभियान को मिशन मोड पर लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि हालत इतनी भयावह है इसका कोई भी आंकड़ा सरकार के पास नहीं है। हालांकि, इसकाकोई सर्वे नहीं किया गया है। एक मोटे अनुमान के अनुसार हिमाचल में एक लाख के करीब परिवार नशाखोरी की समस्या से जूझ रहे हैं।
ओपी शर्मा ने कहा कि छोटी उम्र में नशे का आदी हो जाने से युवाओं में मैंटल हैल्थ की समस्या पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार द्वारा गठित नशा निवार्ण बोर्ड बंद कर दिया गया है। वहीं नशा निवार्ण के लिए फंडिंग भी बंद हो गई है। जबकि नशा निवारण केंद्रों की आहल भी ठीक नहीं है। वहां पर मरीजों से मारपीट की जाती है। यहां तक कि कई जगहों पर नशे की सप्लाई होती है।
हिन्दुस्थान समाचार/ मुरारी/सुनील