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25 फरवरी को समाधिस्थ प.पू.आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज की अंतरराष्ट्रीय श्रद्धांजलि सभा पूरे विश्व में होगी
मन्दसौर 24 फरवरी (हि.स.)। आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के शिष्य प.पू. मुनिश्री विमलसागर जी, प.पू. मुनिश्री अनंतसागर जी, प.पू. मुनिश्री धर्मसागरजी एवं प.पू. मुनिश्री भावसागरजी महाराज का मंगल प्रवेश प्रातःकाल की बेला में हुआ। जगह जगह पाद प्रक्षालन किया गया, आरती उतारी गई।
24 फरवरी को श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं श्री अभिनंदननाथ दिगंबर जैन मंदिर के दर्शन हेतु गए, इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधन करते हुए मुनि श्री विमलसागर महाराज जी ने कहा कि दान सुखों की खान है, दान से अनंत गुना फल मिलता है। श्रीफल चढ़ाने से राज्य की प्राप्ति होती है, इसके फल का वर्णन हम कह नहीं सकते हैं, प्रत्येक आत्मा में अनंत शक्ति है। बस जगाने की आवश्यकता है। यह सुख वास्तविक सुख नहीं है। फास्ट फूड में अशुद्ध पदार्थ होते है। जो सूर्य के प्रकाश में भोजन करता है, वह विश्व में प्रकाशित होता है । पहले भारत में बैठ कर ही भोजन करते थे, आज पश्चिमी सभ्यता के कारण खड़े होकर करने लगे है । सम्मान के साथ ही भोजन करना चाहिए ।
मुनि श्री भावसागर जी ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने महासमाधिकरण किया है, वह हमेशा गरीबों के लिए चिंतित रहते थे, आचार्य श्री ने जो कार्य किए है वह स्वर्ण अक्षरों में लिखने लायक है ।
कमेटी ने बताया कि निर्यापक मुनिश्री अभयसागर जी एवं मुनिश्री अक्षयसागर जी , मुनिश्री प्रशस्तसागरजी , मुनिश्री प्रयोगसागर जी, मुनिश्री प्रबोधसागर जी, मुनिश्री प्रणम्यसागरजी, मुनिश्री प्रभातसागर जी, मुनिश्री चंद्रसागर जी महाराज का मुनि दीक्षा दिवस मनाया गया प्रातःकाल आचार्य श्री की पूजन हुई, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, शास्त्र अर्पण एवं पाद प्रक्षालन किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार/अशोक झलौया