[ad_1]

शिमला, 26 फ़रवरी (हि.स.)। हिमाचल विधानसभा में सोमवार को विपक्ष ने स्वास्थ्य विभाग पर लाए कटौती प्रस्ताव की चर्चा में स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पदों, हिमकेयर योेजना की लंबित देनदारी और दवा माफिया के हावी होने का मुद्दा जोरशोर से उठाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ करने की भी बात रखी।
सुलह के भाजपा विधायक विपिन परमार ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र सुलह के कई अस्पतालों में चिकित्सा अधिकारियों के पद रिक्त हैं। लेकिन अगले वितीय वर्ष के बजट में चिकित्सा अधिकारियों के पदों को भरने का कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा ने लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए पीएचसी खोले थे, जिसे मौजदूा सरकार ने बंद कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में निशुल्क दवा रोगियों को नहीं मिल रही है।
उन्होंने आईजीएमसी और टांडा मेडिकल काॅलेज में रोबोटिक सर्जरी शुरू करने का भी सरकार से आग्रह किया। विपिन परमार ने कहा कि हिमकेयर योजना लोगों के लिए जीवनदायिनी है, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस योजना की लगभग 200 करोड़ की देनदानियां चुकता नहीं की हैं।
उना के विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी कुछ किया जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दवाई माफिया मौजूदा सरकार में भी पूरा सक्रिय है। दवाई माफिया ने दवाइयों पर कमीशन के जरिए करोड़ों की संपति बना ली है। उन्होंने आरोप लगाया कि माफिया दबाव बनाकर डाॅक्टरों के तबादले भी कर रहा है। उन्होंने इससे निपटने के लिए कड़ी कार्रवाई करने की मांग उठाई। सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि पूर्व सरकार द्वारा चलाई गई हिमकेयर योजना की देनदारियां वर्तमान सरकार जारी नहीं कर रही है। इस वजह से अस्पतालों में गरीब व आम आदमी को उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है। उन्होंने उना में निर्माणाधीन सब हेल्थ सेंटर के कार्य में तेजी लाने का आग्रह किया।
कटौती प्रस्ताव में बोलते हुए पांवटा साहिब के विधायक सुखराम चौधरी ने पांवटा के मुख्य अस्पताल में स्टाफ की कमी का मुददा उठाया। सुखराम चौधरी ने कहा कि मौजूदा समय में पांवटा साहिब का सिविल अस्पताल बीमार है और आईसीयू में चला गया है। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल चार विधानसभा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सुखराम चैेधरी ने कहा कि पांवटा साहिब में 150 बिस्तरों के अस्पताल में ओपीडी बहुत ज्यादा है, लेकिन पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इस अस्पताल में 50 में से 19 स्टाफ नर्स नहीं हैं। वहीं चतुर्थ श्रेणी में 21 में से 10 पद ही भरे हैं। इस अस्पताल में रेडियोलोजिस्ट का पद भी रिक्त है। उन्होंने प्रदेश सरकार से हिमकेयर की देनदारियों को जारी करने का भी सरकार से आग्रह किया।
जसवां प्रागपुर के विधायक बिक्रम सिंह ने भी अपने हल्के के स्वास्थ्य संस्थानों में डाॅक्टरों व नर्सों के रिक्त पदों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री का ससुराल है और लोगों को बडी उम्मीद थी। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनके विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य संस्थानों की हालत खस्ता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में डाॅक्टरों के अतिरिक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भी पद रिक्त पड़े हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को उनके हल्के का दौरा कर यहां के स्वास्थ्य संस्थानों का जायजा लेना चाहिए। बिक्रम सिंह ने प्रदेश सरकार पर कांगड़ा जिले को स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेदखी करने का आरोप भी लगाया।
मंडी के विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी है और ग्रामीण इलाकों के लोगों केा स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। प्रदेश सरकार ने सतासीन होने के बाद कई संस्थान बंद कर दिए। उन्होंने यह भी काह कि पूर्व सरकार के समय में खुले जो पहले खुल चुके थे आज हालात यह है कि वहां डाॅक्टर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने जो स्वास्थ्य संस्थान खोले थे, उनमें डाॅक्टर नहीं हैं और बिना डाॅक्टर के स्वास्थ्य संस्थानों का कोई फायदा नहीं है।
चुराह के विधायक हंसराज ने कहा कि मेडिकल काॅलेज चंबा में डाॅक्टरों की भारी कमी है। कई विभागों में उपयुक्त स्टाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि चुराह के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में सरकार बदलने पर कई डाॅक्टरों के तबादले कर दिए गए।
भरमौर के विधायक डाॅक्टर जनक राज ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र पांगी-भरमौर की दुर्गम भौगोलिक को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भरमौर में डाॅक्टरों के 127 पद स्वीकृत हैं और इनमें 87 पद रिक्त हैं। इसाके अलावा पीएचसी व सीएचसी में भी कई पद रिक्त हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से वर्तमान जनसंख्या के हिसाब से डाॅक्टरों का कैडर बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने डाॅक्टरों की एनपीए की मांग को जायज ठहराया।
श्री नैना देवी के विधायक रणधीर शर्मा ने कटौती प्रस्ताव में कहा कि स्वास्थ्य महकमा लोगों की सेहत से जुड़ा है और सरकार को इस पर गंभीर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार बेसहारा व अनाथ बच्चों के लिए सुखाश्रय योजना चला रही है, तो दूसरी ओर हिमकेयर व गंभीर बीमारियों से ग्रसित सहारा योजना के पैसे लटकाकर विरोधाभास पैदा कर रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार से हिमकेयर व आयुष्मान योजना की देनदारियां 31 मार्च से पहले जारी करने का आग्रह किया।
रणधीर शर्मा ने दवा कंपनियों के सैंपल फेल होने को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि इसमें भ्रष्टाचार की बू आ रही है। इससे हिमाचल का नाम बदनाम हो रहा है और प्रदेश सरकार को आरोपियों के विरूद्व कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। रणधीर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि सरकार हर हल्के में सुविधाओं से लैस आदर्श स्वास्थ्य संस्थान बनाएगी। लेकिन श्रीनैनादेवी के आदर्श स्वास्थ्य संस्थान एक ही डाॅक्टर के सहारे चल रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर भाजपा विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों के स्वास्थ्य संस्थानों से भेदभाव करने का आरोप लगाया।
उन्होंने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य संस्थानों में डाॅक्टरों की तैनाती के लिए जनसंख्या का मापदंड हटाया जाए तथा पीएचसी में कम से कम एक डाॅक्टर और सीएचसी में कम से कम तीन डाक्टर की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। सरकार के पास पैसा नहीं है। उन्होंने प्रदेश सरकार से कोरोना काल में आक्सीजन प्लांट के लिए आउटसोर्स पर तैनात कर्मचारियों को नौकरी से हटाने का उल्लेख करते हुए इन्हें दोबारा से नियुक्त करने की भी मांग की।
नाचन के विधायक विनोद कुमार ने कहा कि उनके विधानसभा में चार आयुर्वेदिक अस्पतालों में डाॅक्टरों की भारी कमी है और सरकार जल्द यहां नियुक्तियां करे। उन्होंने कहा कि सता परिवर्तन के बाद प्रदेश में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को सहारा योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर बीएमओ सहारा योजना के आवेदन नहीं ले रहे हैं।
सरकाघाट के विधायक दिलीप ठाकुर ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के स्वास्थ्य संस्थानों में मेल व फीमेल हेल्थ वर्करों के कई पद रिक्त हैं।
बिलासपुर के विधायक त्रिलोक जंबाल ने कहा कि पिछले 10 सालों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई क्रांति आई है। केंद्र सरकार ने चंबा, हमीरपुर, नाहन, नेर चैक को मेडिकल कालेज की सौगात दी। इसी तरह उना में पीजीआई सैटलाइट सेंटर खोला तो बिलासपुर में एम्स खुला। उन्होंने कहा कि चार दिन पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसूख मांडविया ने बिलासपुर दौरे के दौरान एक दिन में प्रदेश को स्वास्थ्य क्षेत्र में 431 करोड़ की सौगातें दीं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की आयुष्मान और पूर्व प्रदेश सरकार की हिमकेयर योजना गरीबों के लिए शुरू की गई थीं, लेकिन मौजूदा सरकार इन योजनाओं की धनराशि लटकाने का काम कर रही है। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य की सुविधाओं को लेकर सजग नहीं है। उन्होंने कहा कि 900 की ओपीडी वाले बिलासपुर अस्पताल में मात्र एक ही एंबुलेंस है। द्रंग के विधायक पूर्ण चंद ठाकुर ने कहा कि उनके हल्के में दो सिविल असपताल, दो सीएचवी, 13 पीएचसी और 54 सब हेल्थ सेंटर हैं और इनमें कई पद रिक्त चल रहे हैं।
चर्चा में रीना कश्यप, राकेश जंबाल, जीतराम कटवाल, पवन काजल, डीएस ठाकुर और इंद्र सिंह ने भी हिस्सा लिया। शाम सात बजे सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल कल कटौती प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देंगे।
हिन्दुस्थान समाचार/ उज्जवल/सुनील