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नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। अब देश की परित्यक्त खदानों को बंद करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। शुक्रवार को एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मंत्रालय ने खदान बंद करने की रूपरेखा को मजबूत करने और सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं को अपनाने के लिए मौजूदा खदान योजना दिशा निर्देशों की समीक्षा करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई है। गतिविधियों को सुव्यवस्थित और मॉनिटर करने के लिए सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) ने एक पोर्टल विकसित किया है।
अब तक ऐतिहासिक रूप से खदानों को बंद करने की प्रक्रियाएं अनियंत्रित रही हैं। इसके तहत उपकरण और सामग्री को छोड़ दिया जाता रहा है और खदान स्थलों को उपेक्षित कर दिया जाता रहा है। इस तरह गैर वैज्ञानिक तरीके से खदानों को बंद करने से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा था। इनसे होनेवाले भौतिक और पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए परित्यक्त व बंद खदान में वर्गीकृत किया है। इन खदानों को सुरक्षित और स्थायी तौर पर इस तरह से बंद किया जाएगा ताकि पर्यावरण को नुकसान कम हो।
प्रवक्ता ने बताया कि कोल इंडिया लिमिटेड ने मंत्रालय के दृष्टिकोण के अनुरूप खदानों की पहचान की है और उन्हें बंद करने की दिशा में सक्रिय कदम उठाए हैं। 2009 से पहले और 2009 के बाद की कुल 169 खदानों की पहचान की गई है। इन्हें परित्यक्त या बंद माना जाता है। इनमें से 2009 से पहले की 68 खदानें अंतिम रूप से बंद करने के लिए चिह्नित हैं। इनमें से 63 अंतिम खदान बंद करने की योजना तैयार कर ली गई है। इसके अतिरिक्त 2009 से पहले की 14 खदानों को अस्थायी तौर पर बंद करने के लिए नामित किया गया है। इनमें से प्रत्येक के लिए व्यापक अस्थायी खदान बंद करने की योजना विकसित की गई है।
हिन्दुस्थान समाचार/ बिरंचि सिंह/दधिबल
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