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– अरणि मन्थन से प्रकट होगी अग्नि, कुण्ड में होगी स्थापित
अयोध्या, 18 जनवरी (हि.स.)। श्रीराम जन्मभूमि पर बन रहे श्रीरामलला की मूर्ति के जलाधिवास के साथ ही तीसरे दिन के अनुष्ठान को विश्राम दे दिया गया। इसके साथ ही चौथे दिन यानी शुक्रवार को होने वाले अनुष्ठान के समय में परिवर्तन कर दिया गया है। शुक्रवार की सुबह 8:55 बजे से ही अनुष्ठान शुरू हो जायेगा। अरणि मन्थन द्वारा प्रगट हुई अग्नि को भी शुक्रवार को कुण्ड में स्थापित किया जायेगा।
आचार्य अरुण दीक्षत के अनुसार 19 जनवरी शुक्रवार को प्रातः 09 बजे अरणि मन्थन से अग्नि प्रकट होगी। उसके पूर्व गणपति आदि स्थापित देवताओं के पूजन का कार्य सम्पादित कर लिया जायेगा। इसके बाद द्वारपालों द्वारा सभी शाखाओं का वेद पारायण, देव प्रबोधन, औषधाधिवास, केसर अधिवास, घृत अधिवास, कुण्ड पूजन, पञ्चभू संस्कार आदि होगा। इसी दौरान अरणि मन्थन द्वारा प्रगट हुई अग्नि को कुण्ड में स्थापित किया जायेगा। ग्रह स्थापन, असंख्यात रुद्रपीठ स्थापन, प्रधान देवता स्थापन, राजाराम-भद्र-श्रीरामयन्त्र-बीठदेवता-अङ्गदेवता-आवरण देवता-महापूजा, वारुण मण्डल, योगिनी मण्डल स्थापन, क्षेत्रपाल मण्डल स्थापन, ग्रहहोम, स्थाप्यदेव होम, प्रासाद वास्तु शांति, धान्य अधिवास सायंकालिक पूजन एवं आरती के साथ चौथे दिन के अनुष्ठान को विश्राम दिया जायेगा।
क्या है अरणि मन्थन
शमी और नारायण स्वरूप पीपल के काठ के लकड़ी से बना हुआ एक यंत्र है। इन दोनों से होने वाले मंथन को ही अरणि मन्थन कहते हैं। इसके मंथन से अग्नि उत्पन्न होती है और उसी का प्रयोग कर यज्ञ कराया जाता है।
हिन्दुस्थान समाचार/डॉ. आमोदकांत /पदुम नारायण