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– एक्सटेंडेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत स्वास्थ्य संस्थाओं में शुरू की गई सुविधा
भोपाल, 26 फरवरी (हि.स.)। गर्भावस्था में उच्च जोखिम की स्थिति की पहचान एवं बचाव के उपाय की जानकारी क्यूआर कोड स्कैन करके मिल सकेगी। साथ ही गर्भावस्था के दौरान पोषण आहार, व्यायाम, आयरन फोलिक एसिड के सेवन इत्यादि जानकारी भी महिलाएं आसानी से प्राप्त कर सकेंगी। यह सुविधा एक्सटेंडेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत सोमवार से प्रारंभ की गई है।
जनसम्पर्क अधिकारी अरुण शर्मा ने बताया कि ये क्यूआर कोड भोपाल के सिविल अस्पताल डॉ कैलाशनाथ काटजू महिला चिकित्सालय एवं जिला चिकित्सालय जयप्रकाश में लगाए गए हैं। ओपीडी पर्चे पर भी क्यू कोड के स्टीकर चिपकाए गए हैं। जिले की अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं में भी क्यू आर कोड शीघ्र ही लगाए जाएंगे। गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को एक्सटेंडेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अभियान में गर्भावस्था की दूसरी एवं तीसरी तिमाही की महिलाओं की जांच कर हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं का चिन्हांकन किया जा रहा है। 25 फरवरी को अवकाश होने के कारण 26 तारीख को पीएमएसएमए शिविर 64 स्वास्थ्य संस्थाओं में आयोजित किए गए।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पूनम श्रीवास्तव ने बताया कि क्यू आर कोड को स्कैन करके गर्भवती महिलाएं स्वयं ही उच्च जोखिम के लक्षणों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगी। गर्भवती महिलाओं में खून की कमी के लक्षण, एनीमिया के दुष्प्रभाव, एनीमिया से बचाव के उपाय, आयरन की गोलियों के लाभ, गर्भावस्था में मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप, पोषण आहार एवं सामान्य व्यायाम जैसी उपयोगी जानकारियां गर्भवती महिला एवं उनके परिजन जान सकेंगे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि गर्भावस्था में एनीमिया, गर्भावस्था जनित उच्च रक्तचाप, गर्भावस्था जनित डायबिटिज़, पूर्व में ऑपरेशन द्वारा प्रसव इत्यादि लक्षण होने पर हाई रिस्क प्रेगनेंसी के रूप में चिन्हित किया जाता है। इन महिलाओं को विशेष चिकित्सकीय देखभाल एवं परामर्श की सेवाए प्रदान की जाती है।
शिविर में विशेषज्ञीय चिकित्सकीय परामर्श के साथ हीमोग्लोबिन, यूरिन एल्ब्युमिन, शुगर, मलेरिया, टीबी, हेपेटाईटिस, ओरल ग्लूकोज़ टेस्ट, ब्लड ग्रुप, एचआईवी, सिफलिस की जांच की जाती है। चिकित्सकीय परामर्श अनुसार सोनोग्राफी एवं थायराईड की जांच भी की जाती है। मातृ मृत्यु दर को न्यूनतम करने के लिए, उच्च जोखिम की गर्भवती महिलाओं का सही समय पर चिन्हांकन किया जाना बेहद आवश्यक है। जिससे इन गर्भवती महिलाओं को विशेष देखभाल एवं चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध करवाई जा सके। हाईरिस्क महिलाओं की न्यूनतम 4 जांचों के साथ 3 अतिरिक्त जांचे भी की जाती हैं। जिनमें से न्यूनतम एक जांच स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा की जाती है।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश