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आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश धर्म जागरण प्रमुख ने कहा- कैसे अन्य मंदिरों को छोड़ देंगे
वाराणसी, 25 फरवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश धर्म जागरण प्रमुख अभय कुमार ने कहा कि 1528 से अयोध्या में रामजन्मभूमि को लेकर सनातनी समाज लगातार लड़ रहा था। 1947 के पहले पूर्वजों ने 76 बार रक्ताजंलि दी है लेकिन उनको ये अवसर प्राप्त नहीं हुआ। भगवान ने उनको निमित्त नही बनाया। उन्हें निमित्त बनाया कि संघर्ष रखना है,संघर्ष के ज्योति को जलाए रखना है। अपने वंशजों को बताए रखना है कि ये हमारा है। भगवान का है। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज ज्ञानवापी के साथ ही काशी के अन्य हिंदू मंदिरों पर भी अपना दावा करें।
पूर्वी उत्तर प्रदेश धर्म जागरण प्रमुख रविवार को भारतीय ज्ञान परंपरा और ज्ञानवापी विषयक गोष्ठी,सम्मान समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।
ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद काशी की ओर से गोलघर स्थित पराड़कर भवन में आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता अभय कुमार ने कहा कि अयोध्या में सब अच्छा-अच्छा हो गया लेकिन संशय भी खड़ा हो गया। संशय ये है कि हमको आपने बड़ा बना दिया। हमको ध्यान में आना चाहिए कि भगवान बड़े हैं,मैं नही। कई ऐसे लोग अलग-अलग खड़े हो गए। जो कह रहे है कि बाबा विश्वनाथ और कृष्ण जन्मभूमि हमें दे दीजिए बाकी सब छोड़ देंगे। धर्म जागरण प्रमुख ने ऐसे लोगों के बयान पर असहमति जताते हुए सवाल खड़ा कर कहा कि ये लोग कौन है,किसने इन्हें ये जिम्मेदारी दी। उन्होंने कहा कि हम कैसे अन्य मंदिरों को छोड़ देंगे। उन्होंने ऐसे लोगों पर तंज कसते हुए कहा कि आपको भूमिका मिली है सिर्फ लड़ने की, निर्णय करने की नहीं। इतने बड़े बनने की जरूरत नहीं है। हम उन पूर्वजों की संतानें है जो इस लम्बे संघर्ष में अपने गर्दन कटवा दिए।
उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज ज्ञानवापी के साथ ही काशी के अन्य हिंदू मंदिरों पर भी अपना दावा करें। ज्ञानवापी शब्द हमारे संस्कृति ,परम्परा को परिलक्षित करता है । हिन्दू समाज को अब जगह— जगह गोष्ठी एवं संवाद के माध्यम से भारत के मूल तत्व और भावबोध को समझाना होगा। उन्होंने कहा कि हिंदू बड़ा ही सहिष्णु एवं स्वभिमानी होता है । इसीलिए सनातन संस्कृति अपने मूल स्वरूप की ओर लौटने को लेकर तत्पर है। गोष्ठी में प्रदेश सरकार के मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने कहा कि ज्ञानवापी हिंदुओं को मिलनी चाहिए इसमें कोई विवाद का विषय ही नहीं है। बीएचयू के पत्रकारिता विभाग के प्रो. ज्ञान प्रकाश मिश्र ने कहा कि मुसलमान अपने ऐतिहासिक गलतियों को सुधारें एवं हिन्दू समाज से माफी मांगे। क्योंकि उनके डीएनए में भगवान राम ही हैं। और वे उन्हीं की संतान हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अपनी प्रतीकात्मक पोशाक को छोड़ आम भारतीयों के वेशभूषा को धारण कर लेना चाहिए। गोष्ठी की अध्यक्ष करते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो.नागेंद्र पांडेय ने कहा कि 22 जनवरी को जबसे रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई है। तब से हिन्दू समाज ज्ञानवापी को लेकर अत्यंत उत्साही है। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी पर न्यायालय ने जो फैसला दिया है उससे हिन्दू समाज अत्यंत उत्साह में है और देश के अन्दर एक सुंदर सकारात्मक वातावरण बना हुआ है। इसके पहले महापरिषद के अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ल ने संगठन की रूपरेखा,संघर्ष और आने वाले कार्यक्रमों को बताया। गोष्ठी में श्री राममंदिर आंदोलन में विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले पत्रकारिता, समाज सेवा से जुड़े प्रमुख लोगों को भी सम्मानित किया गया। जिसमें वरिष्ठ पत्रकार पदमपति शर्मा, डॉ उपेंद्र विनायक सहस्त्रबुद्धे, राजू पाठक,अरुण जायसवाल आदि शामिल रहे। गोष्ठी में धन्यवाद ज्ञापन संयोजक राजा आनंद ज्योति सिंह ने किया।
कार्यक्रम में प्रिया, त्रिलोक नाथ शुक्ल, दिनेश पाठक, अधिवक्ता द्वय अनघ शुक्ल, रमेश उपाध्याय, प्रांजल पांडेय, आशीष, गौरव प्रकाश आदि की उपस्थिति रही।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर/प्रभात