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पूर्वी चंपारण,22 मार्च(हि.स.)। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग, संगणक विज्ञान, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी संकाय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित ‘डिजिटल एंड टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट फ़ॉर सस्टेनेबल लाइब्रेरीज’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन शुक्रवार को किया गया।
इसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने की। समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो.पी.के बाजपेयी मौजूद थे। जबकि की-नोट स्पीकर प्रो. के. एल. महावर, बीबीएयू , लखनऊ और विशिष्ट वक्ता डॉ. अमित कुमार, केंद्रीय विश्वविद्यालय, गुजरात थे। समारोह में अतिथियो का स्वागत प्रो. रंजीत कुमार चौधरी ने की। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है,कि डिजिटल और तकनीकी को आधार बनाकर पुस्तकालय का सतत विकास पर केंद्रित यह संगोष्ठी नए आयामों को स्थापित करेगी।
पुस्तकालय सूचना और ज्ञान का महत्वपूर्ण मंच है। इसकी समृद्धि से ज्ञान और विचार का विस्तार होगा। शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को पुस्तकालय का भरपूर उपयोग करना चाहिए । मुख्य अतिथि प्रो. पी. के. बाजपेयी ने पुस्तकालय निर्माण एवं उपयोग के विभिन्न पक्षों पर चर्चा करते कहा कि पुस्तकालय के लिए इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों और बुनियादी ढांचे की समृद्धि को जरूरी है।
की-नोट स्पीकर प्रो. के. एल. महावर ने वर्तमान परिदृश्य की जरूरतों के अनुसार हरित पुस्तकालय और मानव संसाधन विकास पर चर्चा करते कहा कि समय की मांग है कि हरित पुस्तकालय की अवधारणा को अपनायी जाए। विशिष्ट वक्ता डॉ. अमित कुमार ने सतत या टिकाऊ पुस्तकालय की चुनौतियों पर चर्चा करते कहा कि टिकाऊ पुस्तकालयों के लिए सबसे बड़ी चुनौती तकनीकी में नित नए हो रहे परिवर्तन और संसाधनों का बेहतर उपयोग है।समारोह मे
धन्यवाद ज्ञापित करते प्रो. रंजीत कुमार चौधरी ने कहा कि संगोष्ठी में आये विद्वानों और शोधार्थियों द्धारा विषय के विभिन्न आयामों पर डाले गये प्रकाश से पुस्तकालय के भविष्य को नई दिशा मिलेगी। संगोष्ठी में प्रस्तुत कुल 46 शोध पत्र मे से 28 शोध पत्र शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए। इस दौरान कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने ‘डिजिटल एंड टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट फ़ॉर सस्टेनेबल लाइब्रेरीज’ पर आधारित सारांश पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया। संगोष्ठी की संक्षिप्त रिपोर्ट विभाग की सहायक आचार्य डॉ. सपना ने प्रस्तुत की।
हिन्दुस्थान समाचार/आनंद प्रकाश