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नेपाल, 27 फरवरी (हि.स.)। नेपाल में पर्यटकों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने के कारण यहां के होटल व्यवसायियों ने भारतीय पर्यटकों के आगमन को सरल बनाने के लिए अनावश्यक कानूनों में बदलाव की मांग की है।
नेपाल के होटल व्यवसायियों की साझा संस्था होटल एसोसिएशन ऑफ नेपाल, पर्यटक कंपनियों की साझा संस्था टूरिज्म एसोसिएशन ऑफ नेपाल और नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ ने मंगलवार को लुम्बिनी में संयुक्त पत्रकार वार्ता के दौरान यह मांग की। नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के प्रतिनिधि अजीत बस्नेत ने कहा कि सबसे पहले तो सरकार की तरफ से उस नियम में बदलाव करने की आवश्यकता है जिसमें भारतीय पर्यटकों को नेपाल आते समय सिर्फ 25 हजार तक की धनराशि लाने की अनुमति है। इसको बढ़ा कर कम से कम एक लाख रुपये किया जाना चाहिए। बस्नेत का दावा है कि नेपाल आने वाले विदेशी पर्यटकों में सबसे अधिक व्यय क्षमता भारतीय पर्यटकों की होती है। इसलिए अपने साथ लाने वाली धनराशि की अधिकतम सीमा को बढ़ाने की आवश्यकता है।
होटल एसोसिएशण ऑफ नेपाल के प्रतिनिधि प्रवीण बहादुर पाठक ने कहा कि विश्व के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश के पर्यटकों को लक्षित करते हुए नई नीति बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नेपाल की सीमा से सटे भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य की कुल जनसंख्या के 1-2 प्रतिशत लोगों को भी नेपाल के विभिन्न पर्यटकीय और धार्मिक शहरों में लाने में सफल रहे तो किसी और देश की तरफ देखने की भी आवश्यकता नहीं होगी। पाठक ने बताया कि इस समय भारतीय नंबर प्लेट की गाड़ियों को कस्टम ड्यूटी के बिना सिर्फ 07 किलोमीटर तक ही जाने की इजाजत है जिसको बढ़ाकर कम से कम 25-30 किमी किया जाना चाहिए।
पत्रकार वार्ता के दौरान नेपाल में भारतीय वाहनों से वसूले जाने वाले अनावश्यक टैक्स पर प्रतिबंध लगाने और पर्यटन स्थलों पर नेपाली जनता की तरह ही शुल्क लेने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि नेपाल में कई सड़कों की हालत खस्ता है, जिस कारण नेपाल के विभिन्न शहरों में घूमने आने वाले भारतीय पर्यटकों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसलिए सरकार को तत्काल इस ओर ध्यान देना चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार/पंकज दास/पवन