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राम मंदिर से भारत के जीवनमूल्यों की प्रतिष्ठा बढ़ी
अयोध्या, 24 जनवरी (हि.स.)। रामलला अपनी जन्मभूमि से पांच सौ वर्ष तक निर्वासित रहे। अब रामराज्य की नींव पड़ी। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा केवल एक मंदिर की ही प्रतिष्ठा नहीं है, यह भव्य भारत की प्रतिष्ठा है। यह बातें विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मंत्री व प्रवक्ता अशोक तिवारी ने हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी से साक्षात्कार के दौरान कही। प्रस्तुत है हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी के वरिष्ठ संवाददाता बृजनन्दन राजू से उनकी बातचीत के संक्षिप्त अंश।
रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा को आप किस रूप में देख रहे हैं?
यह केवल रामलला की प्रतिष्ठा नहीं है। यह दुनिया में भारत के स्वाभिमान की प्रतिष्ठा है। भारत की मर्यादा, परम्पराओं और मान्यताओं की प्रतिष्ठा है। भारत के जीवनमूल्यों की प्रतिष्ठा है। राम मंदिर से दुनिया में भारत का गौरव व उसका स्वाभिमान बढ़ा है। जो कहते थे कि हिन्दू एक रौंदी हुई कौम है। यह पद दलित व आतताईयों द्वारा रौंदी हुई कौम है। हिन्दू अपने अपमान का परिमार्जन कर सकता है। उसका बदला भी ले सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह कार्यक्रम दुनिया को शांति का संदेश दिया है।
रामलला भव्य दिव्य मंदिर में विरामान हो गए हैं। आपको कैसी अनुभूति हो रही है?
जो उस क्षण के अनुभव हैं वह तो भगवान के कृपा की अनुभूति है। उसे शब्दों में बयां कर पाना संभव नहीं है। मंदिर परिसर में विराजमान सभी संत गदगद थे। कहा गया कि गिरा अनयन नयन बिन वाणी। जिसने देखा है उसको वाणी नहीं है जो बोल सकता है उसको वाणी नहीं है। उस दृश्य का वर्णन वर्णनातीत है। मैंने देखा कि कितने संत रोते रहे।
प्राण प्रतिष्ठा समारोह में कितने मत-पंथों के संत आये थे?
देश के 150 से अधिक मत पंथ सम्प्रदाय उपासना पद्धति आध्यात्मिक परम्पराओं के पूज्य संत यहां उपस्थित थे। इससे अधिक 50 से अधिक जनजातीय धार्मिक परम्पराओं के संत व प्रतिनिधि यहां उपस्थित थे। गिरिवासी, वनवासी, ग्रामवासी, तटवासी, द्वीपवासी ऐसा कोई क्षेत्र अछूता नहीं रहा, जिस उपासना परम्पराओं के पूज्य संत यहां न आये हों। मैं समझता हूँ कि शायद पहली बार ऐसा हुआ होगा कि इतनी परम्पराओं के लोग एक साथ अयोध्या आये।
दुनिया के कितने देशों के प्रतिनिधि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आए?
इस कार्यक्रम में 40 देशों के प्रतिनिधि आये थे, जिनमें से 17 देशों के संत भी यहां पधारे थे। स्पेन, गुयाना, सूरीनाम, मलेशिया, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका, नेपाल व म्यांमार समेत कई देशों के लोग आये थे।
विशेष सम्पर्क विभाग की दृष्टि से विहिप अब किन विषयों पर काम करेगी?
राम ने जिस मर्यादा व जीवनमूल्यों की स्थापना की, जिनके कारण राम मर्यादा पुरूषोत्तम कहलाये। समाज में उन मर्यादाओं की स्थापना। उन मर्यादाओं के अनुरूप जीवन की प्रतिष्ठा करनी है। इसकी शुरूआत समाज से होनी चाहिए। कैसा जीवन जीना है। भारतीय जीवन मूल्य दुनिया की संस्कृतियों के श्रेष्ठ जीवनमूल्य हैं। समाज को शान्त सुखी और सम्पन्न बनाने के लिए जितना विचार हमारे यहां हुआ, उतना विचार दुनिया की किसी संस्कृति में नहीं हुआ। एक सामान्य से जीव में भगवान का दर्शन यहां का आम व्यक्ति करता है। आत्मवत् सर्वभूतेष यह भारत का दर्शन है। यह विचार केवल विचार में न रह जाये व्यक्ति के व्यवहार में इस विचार की प्रतिष्ठा करनी पड़ेगी।
कांग्रेस ने रामलला का निमंत्रण ठुकराया और वहीं राहुल गांधी मंदिर में जाने के लिए धरना देते हैं, क्या कहेंगे?
भगवान तो सबको गले लगाते हैं। लेकिन कुछ लोगों के कर्म ऐसे होते हैं कि वह उनका प्रायश्चित नहीं करना चाहते। जिन्होंने निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया, उनके सामने अच्छा अवसर था। जिन्होंने कहा था कि राम काल्पनिक हैं। यदि वे आते तो लोग सब बातें भूल जाते, लेकिन उन्होंने समाज को उन बातों को याद करने के लिए अवसर दे दिया है।
हिन्दुस्थान समाचार/बृजनन्दन/राजेश