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अयोध्या, 22 जनवरी (हि.स.)। क्षण था श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा का और श्रीराम मंदिर परिसर में मिलन हो रहा था, श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़ी विभूतियों का। मिलन के इस अवसर पर इनकी खुशियां, आंसू बनकर छलक रही थीं। एक-दूसरे से लिपटकर सब रो रहे थे।
दरअसल, प्राण प्रतिष्ठा के लिए आमंत्रित लोगों में श्रीराम मंदिर आंदोलन और श्रीरामलला विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा तक लगातार अपनी ताकत, श्रद्धा और निष्ठा से समर्पित रहने वाली तीन महान विभूतियां अचानक आमने-सामने आ गयीं। ये विभूतियां थीं, साध्वी ऋतंभरा, मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति। जब इनकी मुलाक़ात हुई तब बिना कुछ कहे तीनों की आंखे भर आईं। तीनों गले मिलीं और एक-दूसरे को गले लगाकर रो पड़ीं। शायद, श्रीराम मंदिर आंदोलन से जुड़े संघर्ष की घटनाएं उन्हें याद आ गयीं और फफक पड़ी।
इधर, पूर्व कानून मंत्री और श्रीरामलला के वकील रहे रविशंकर प्रसाद भी अपने स्थान किंकर्तव्यविमूढ़ खड़े रहे। इनकी आंखें भरी थीं। कुछ भी बोल पाने में खुद को असमर्थ दिख रहे थे। बस मौन रूप से श्रीरामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा को निहार रहे थे। बागेश्वर सरकार धीरेन्द्र शास्त्री और प्रसिद्ध सूफ़ी गायक कैलाश खेर का मिलन भी भावुक कर देने वाला था। कैलाश खेर, बागेश्वर सरकार धीरेन्द्र शास्त्री से लिपटे हुए थे और दोनों की आँखें भरी हुई थीं। ऐसे ही राम मंदिर आन्दोलन से जुड़े कई अन्य विभूतियों के भी आंखों में खुशी के आंसू छलकते हुए देख गए।
हिन्दुस्थान समाचार/डॉ. आमोदकांत /राजेश