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देहरादून, 07 मार्च (हि.स.)। उत्तराखंड की पांच लोकसभा सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम तय कर पाना कांग्रेस के लिए मुश्किल काम साबित हो रहा है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी भले ही 25 नामों की सूची स्क्रीनिंग कमेटी को भेज चुकी हो, लेकिन स्क्रीनिंग कमेटी की दो बैठकों में माथा पच्ची के बाद भी प्रत्याशियों के नाम तय नहीं किया जा सके हैं, जिसके कारण सूची जारी होने में विलंब हो रहा है, जो संभावित प्रत्याशियों में बेचैनी का कारण भी बना हुआ है।
कांग्रेस प्रत्याशियों के नामों पर अब दिल्ली में होने वाली तीसरी स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में फैसला होने की बात कही जा रही है। दर असल कांग्रेस की अंदरूनी अंतर्कलह के कारण प्रत्याशियों के चयन में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। राज्य की सभी पांच सीटों पर संभावित प्रत्याशियों द्वारा यूं तो बहुत पहले से तैयारियां की जा रही थी, लेकिन जिन उम्मीदवारों ने अपनी पसंद या यह कहें कि जनाधार वाली सीटों पर तैयारी की गई थी, अब उन सीटों की बजाय उन्हें दूसरी सीटों पर चुनाव लड़ने को कहा जा रहा है जिसके लिए वह तैयार नहीं है।
यशपाल आर्य नैनीताल की सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन हरीश रावत जैसे नेता उन्हें नैनीताल की बजाय अल्मोड़ा से चुनाव लड़ने की सलाह दे रहे हैं। हरीश रावत हरिद्वार सीट पर अपने या अपने बेटे को टिकट का सबसे मजबूत दावेदार मानते हैं, लेकिन वह किसी भी दूसरी सीट से चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है। तमाम सीटों परऐसी ही स्थितियां बनी हुई है।
खास बात यह है कि टिकट के लिए पैरवी करना तो समझ में आता है, लेकिन कांग्रेस के नेता एक दूसरे के टिकट कटवाने के लिए दिल्ली के भी चक्कर काट रहे हैं। उन्हें खुद को टिकट मिलेगा या नहीं, इसकी चिंता से ज्यादा फिक्र इस बात की है कि दूसरे को टिकट न मिल जाए।
हालांकि कहा यही जा रहा है कि कल या परसों तक कांग्रेस की सूची जारी हो जाएगी। पार्टी जिसे जिस सीट से प्रत्याशी बनाएगी वह उसे सीट से चुनाव लड़ेगा ही। कोई प्रत्याशी चुनाव लड़ने से मना नहीं कर सकता है, लेकिन जिस कमजोर मनोबल और खींचतान के साथ कांग्रेस लोकसभा चुनाव में जा रही है वह उसके भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं माने जा सकते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/ साकेती/रामानुज