[ad_1]

रतलाम, 15 जनवरी (हि.स.)। पिछले 27 वर्षों से भारतीय रेलवे के लेखाकर्मी पांचवें वेतन आयोग 1 जनवरी 1996 से 18 फरवरी 2003 के वेतन निर्धारण के अंतर भुगतान को लेकर हाई कोर्ट,सुप्रीम कोर्ट से निर्णय के पश्चात भी आज भी इंतजार कर रहे हैं। आंल इंडिया रेलवे अकाउंट स्टाफ एसोसिएशन ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी । इस मामले में लेखाकर्मियों के पक्ष में निर्णय हुआ है।
रेलवे एडवोकेट द्वारा कई बार सुनवाई में उपस्थित न होना ,उपस्थित होकर अनावश्यक जानकारी के लिए तारीख बढ़ाना ,लेकिन आखिरकार दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने निर्णय के अनुसार 2019 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार पूर्व में 56 लेखाकर्मियों को दिए गए एरियर भुगतान निर्णय के अनुसार ही आंल इंडिया रेलवे अकाउंट स्टाफ एसोसिएशन के सदस्यों को जो 2014 की सूची जो अभी तक सूचीबद्ध है उनकी सूची संगठन के अधिवक्ता ने न्यायालय में प्रस्तुत की है । उन्हें इस निर्णय को बरकरार रखते हुए भुगतान के आदेश दिए। यह एक लंबी संघर्ष की लड़ाई थी जिसे ऑल इंडिया रेलवे अकाउंट स्टाफ एसोसिएशन ने प्राप्त किया है।
संगठन के एडवोकेट सुनीता हजारिका एवं साथी वकील ने दलील के दौरान लेखाकर्मियों के पक्ष में पैरवी की और हाईकोर्ट ने निर्णय लेखाकर्मियों के पक्ष में दिया। संगठन के महामंत्री रेजी जॉर्ज, अध्यक्ष पार्थ भट्टाचार्य, वित्त सचिव निर्मल देव और एन चंद्रशेखर, ज्ञानसिंह सिसोदिया आदि सभी ऑफिसबियर ने इसे एक लेखाकर्मियों की उपलब्धि बताया और लेखा कर्मियों के संघर्ष की जीत बताया।
उपरोक्त जानकारी ऑल इंडिया रेलवे अकाउंट स्टाफ एसोसिएशन के कम्युनिकेशन सेक्रेटरी प्रकाश व्यास ने दी। सिसोदिया ने बताया कि रेलवे बोर्ड को अब इस संबंध में आदेश जारी करना बाकी है क्योंकि अब रेल प्रशासन के लिए कोई जगह बची नहीं है जहां अपील करें। पूर्व में सभी अपील खारिज हो चुकी है सिर्फ भुगतान के आदेश ही जारी करना है। संगठन के रतलाम प्रतिनिधि दिलीप कानूनगो ने बताया कि भारतीय रेलवे के 10000 से अधिक तथा रतलाम से 100 से अधिक लेखाकर्मी जो सेवानिवृत्त हैं ,कार्यरत है तथा जिनका निधन हो गया है ,उन्हें भी लाभ की पात्रता हो सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार/ शरद जोशी