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– भारतीय वन प्रबंधन संस्थान भोपाल में औषधीय पौधों संबंधी दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ
भोपाल, 29 फरवरी (हि.स.)। आयुर्वेद हमारी पुरातन चिकित्सा पद्धति है। हजारों वर्षों पूर्व जब कोई अन्य चिकित्सा पद्धति नहीं थी, तब से हम आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का उपयोग करते आ रहे हैं। भारत में लाखों की संख्या में औषधीय वनस्पति की उपलब्धता है। हमारे पास एकस्व दस्तावेजीकरण (पेटेंट) न होने से अन्य देशों ने हमारी औषधियों पर अपना एकाधिकार अर्जित कर लिया है। हमारा देश अब आयुर्वेद के उत्थान के संकल्प और स्वाभिमान के साथ विश्वमंच पर अग्रसर हो रहा है। इसके लिए हमारी आयुर्वेदीय धरोहरों एवं उपलब्धियों पर गर्व के साथ शोध करने की आवश्यकता है।
यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने गुरुवार को भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) भोपाल में औषधीय पौधों की विशेषता और वर्गीकरण एवं संबद्ध विपणन सूचना सेवाओं (एमआईएस) विकास विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सम्मिलित होकर कही। उन्होंने वीसी के माध्यम से सजीव (Live) जुड़कर भारतीय आयुर्वेद दर्शन-निरोगी काया और औषधीय पौधों के उत्पादन, विपणन, संरक्षण, उत्थान एवं दस्तावेजीकरण के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए।
मंत्री परमार ने कहा कि आयुर्वेद के प्रति विश्वास का भाव एवं समाज में जनांदोलन की तरह समग्र विचार स्थापित करना होगा ताकि आधुनिक चिकित्सा पद्धति की तरह आयुर्वेद को चिकित्सा पद्धति की मुख्य धारा में लाया जा सके। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए किसानों के लाभ के साथ औषधीय पौधों के उत्पादन और विपणन पर व्यापक कार्ययोजना बनाए जाने की आवश्यकता है। किसानों के सहयोग से ग्रामीण परिवेश में भी औषधीय पौधों के लिए चेतना जागृत करनी होगी। हमारे आयुर्वेदीय दर्शन निरोगी काया की अवधारणा और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के उत्थान के संकल्प से देश स्वत्त्व के भाव के साथ पुनः विश्वमंच पर स्थापित होगा। उन्होंने प्रासंगिक विषय पर कार्यशाला के आयोजन के लिए राष्ट्रीय औषधि पादप बोर्ड एवं समस्त आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
कार्यशाला में आयुष विभाग के उप सचिव एवं राज्य औषधीय पादप बोर्ड के सीईओ संजय कुमार मिश्रा, उप सचिव पंकज शर्मा, पीएचडीसीसीआई स्टेट डेवलपमेंट काउंसिल एमपी के सचिव अतुल के ठाकुर, भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर की निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, अनुसंधानकर्ता, उद्योगपति, कृषकजन एवं विविध विद्वतजन उपस्थित थे।
यह दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला, राज्य शासन के आयुष विभाग अंतर्गत राज्य औषधीय पादप बोर्ड मप्र (MP-SMPB) एवं वाणिज्य एवं उद्योग के पीएचडी चैंबर (PHDCCI) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित है।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश