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-राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों तथा डीडीओ के साथ गांधीनगर में प्राकृतिक कृषि चिंतन बैठक की
गांधीनगर, 14 मार्च (हि.स.)। गुजरात में प्राकृतिक खेती के अभियान को हम सब अपना मिशन बनाएं, गुजरात की पावन धरा को विषमुक्त करें, गुजरात के किसान को तेजी से समृद्धि की ओर ले जाएं और प्रत्येक क्षेत्र में आदर्श हमारा गुजरात प्राकृतिक खेती में भी भारत की अगुवाई करे: इस दिशा में परिवार भावना से कार्य करें। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने गुरुवार को गांधीनगर में आयोजित प्राकृतिक कृषि चिंतन बैठक में सभी जिला कलेक्टरों तथा जिला विकास अधिकारियों (डीडीओ) को संबोधित करते हुए यह उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह बैठक समग्र भारत देश एवं गुजरात प्रदेश का भाग्य बदलने वाली सिद्ध होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उपस्थिति में स्वर्णिम संकुल स्थित नर्मदा हॉल में आयोजित इस अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य सचिव राज कुमार, कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव ए.के. राकेश, राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति तथा सम्बद्ध विभागों के प्रमुख उपस्थित रहे। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि गुजरात में हाल में 9 लाख किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, जिसके फलस्वरूप इस वर्ष गुजरात में 3,08,748 मैट्रिक टन कम रासायनिक उर्वरक का उपयोग हुआ है। इससे 1,337.92 करोड़ रुपये की तो बचत हुई ही है, साथ ही लाखों टन रासायनिक खाद भी धरती में जाने से रुक गया है। वर्ष 2025 में गुजरात स्थापना दिवस तक गुजरात में 20 लाख किसान प्राकृतिक खेती करने लगें; इस लक्ष्य के साथ सभी मिल कर कार्य करें। आगामी पांच वर्ष में पूरे गुजरात को संपूर्ण प्राकृतिक गुजरात बनाएं। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्राकृतिक खेती को विशेष प्राथमिकता दे रहे हैं। वे रासायनिक खाद का उपयोग कम करने तथा किसानों की आय दुगुनी करने के साथ ही धरती की उर्वरकता बनाए रखने के लिए निरंतर चिंतित हैं। उनके विचारों को शक्ति देने के लिए हम पूरी प्रामाणिकता एवं कर्तव्य भावना से इस कार्य में जुड़ जाएँ।
राज्यपाल ने प्राकृतिक खेती तथा जैविक खेती के बीच का अंतर स्पष्ट कर रासायनिक खेती के साथ-साथ जैविक खेती के नुकसान भी बताए। उन्होंने सभी को रासायनिक खेती के भयावह प्रभावों से अवगत किया। उन्होने ग्लोबल वॉर्मिंग से लेकर मानव स्वास्थ्य को रासायनिक खाद एवं कीटनाशक दवाइयों के अंधाधुंध उपयोग से हो रही गंभीर हानि के विषय में सभी को चेताया और कहा कि इस देश की धरती की उर्वरकता बचानी है, धरती बचानी है, हवा-पानी व वातावरण बचाना है, लोगों को गंभीर-असाध्य रोगों से बचाना है, तो हमारे पास एक ही एवं श्रेष्ठ विकल्प है प्राकृतिक खेती। उन्होंने कलेक्टरों व डीडीओ का मिशन मोड में कार्य करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बैठक में प्रेरक आह्वान किया कि आगामी पांच वर्ष में हमें 100 प्रतिशत प्राकृतिक खेती की ओर जाना है। इस इरादे के साथ प्राकृतिक खेती अभियान को सभी मिशन मोड में अपनाएं। इस संदर्भ में पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिशा-निर्देशन में देश में अमृत सरोवरों के निर्माण से पानी बचाने के लिए सफलतापूर्वक चल रहे अभियान की तरह प्राकृतिक खेती के इस अभियान को भी अपनाने की जरूरत समझाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती का यह कार्यक्रम केन्द्र एवं राज्य सरकार का ऐसा जनहितोन्मुखी कार्यक्रम है कि इस खेती के फलस्वरूप मास इम्पैक्ट होगा तथा यह भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य सुधार तथा सुख-सुविधा का कार्य है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल आचार्य देवव्रत प्राकृतिक खेती का विस्तार करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसके अच्छे परिणाम भी हमने प्राप्त किए हैं। 3 लाख मैट्रिक टन यूरिया का कम उपयोग हुआ है और लगभग 9 लाख किसान प्राकृतिक खेती की ओर मुड़े हैं। भूपेंद्र पटेल ने भूमि स्वास्थ्य सुधार के लिए गाय आधारित इस प्राकृतिक खेती को आवश्यक बताते हुए कहा कि यदि भूमि का स्वास्थ्य सुधरेगा, तो मिट्टी से रेती बनना रुकेगी, अनाज भी अधिक पैदा होगा। उन्होंने कहा कि हमारी दिशा स्पष्ट है। अब प्राकृतिक खेती को अधिक वेग देने के संकल्प के साथ लक्ष्य हासिल करना है। उन्होंने कलेक्टरों तथा डीडीओ से अनुरोध किया कि प्राकृतिक खेती के संदर्भ में अभी और भी कुछ अच्छा हो सके; इस दिशा में उनके सुझावों का भी स्वागत है। उन्होंने विकसित भारत के लिए प्राकृतिक खेती के अभियान द्वारा लीड लेकर गुजरात को अग्रसर रखने के लिए कलेक्टरो-डीडीओ को प्रेरणा देते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि उनके पद का जनहित के ऐसे कार्यों में सदुपयोग करके ही आत्मसंतोष व कार्यसंतोष प्राप्त किया जा सकेगा।
मुख्य सचिव राज कुमार ने कहा कि गुजरात में कृषि महोत्सव की श्रेष्ठ परंपरा तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुरू की है। इस बार प्राकृतिक खेती को अधिक वेगवान बनाने के लिए राज्य में प्राकृतिक कृषि महोत्सव आयोजित करें। उन्होंने सभी कलेक्टरों व डीडीओ से ‘स्वान्त: सुखाय’ प्रोजेक्ट में प्राकृतिक खेती के विभिन्न आयामों का चयन करने का अनुरोध किया।
अपर मुख्य सचिव ए.के. राकेश ने स्वागत संबोधन में कहा कि आज से लगभग तीन वर्ष पहले हम रासायनिक खेती, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती के तिराहे पर खड़े थे। यह स्पष्ट नहीं था कि किस मार्ग पर जाएं, परंतु आज प्राकृतिक कृषि का राजमार्ग सुनिश्चित है। हम नैचुरल फार्मिंग के नेशनल हाईवे पर खड़े हैं। आज से हमें अपने कार्य को विशेष गति देनी है। सभी अधिकारी प्राकृतिक खेती में प्रशिक्षण के महत्व को समझें। सभी गांवों में प्राकृतिक कृषि के मॉडल फार्म बनाने के प्रयास करें। प्राकृतिक कृषि उत्पादों की विक्रय व वितरण व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने के प्रयास करें।
हिन्दुस्थान समाचार/बिनोद/आकाश