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नेपाल, 27 फरवरी (हि.स.)। देश की संसद के ऊपरी सदन राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष पद को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन दाल के दो प्रमुख घटक आमने सामने आ गए हैं। सरकार का नेतृत्व कर रहे माओवादी पार्टी और गठबंधन में सहभागी सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस दोनों ने ही राष्ट्रीय सभा अध्यक्ष पद पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है। राष्ट्रीय सभा के वर्तमान अध्यक्ष गणेश प्रसाद तिमिल्सिना का कार्यकाल 10 मार्च को पूरा हो रहा है। निर्वाचन आयोग ने 12 मार्च को इस पद के लिए निर्वाचन होने की घोषणा की है।
सत्ता का नेतृत्व कर रहे माओवादी पार्टी की स्थाई समिति की बैठक में राष्ट्रीय सभा अध्यक्ष पद पर दावा करने का फैसला किया गया है। पार्टी बैठक के फैसले के बारे में प्रवक्ता अग्नि सापकोटा ने बताया कि गठबंधन की सरकार में शक्ति बंटवारे के सिद्धांत के आधार पर माओवादी पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर अपनी दावेदारी पेश की है। सापकोटा ने कहा कि संवैधानिक पदों के बंटवारे में एक भी स्थाई पद माओवादी के पास नहीं होने के कारण स्वत: ही यह पद हमें मिलना चाहिए। पार्टी की स्थाई समिति के सभी सदस्यों ने एक स्वर में पार्टी अध्यक्ष से इस पद पर अपनी दावेदारी नहीं छोड़ने के लिए दबाव भी दिया है।
पार्टी की बैठक में नेताओं ने यह दलील पेश की है कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रतिनिधि सभा के स्पीकर, डिप्टी स्पीकर सभी पद गठबंधन में सहभागी अन्य दलों के पास है। गठबंधन की सरकार होने के कारण प्रधानमंत्री का पद सीमित समय के लिए है, इसलिए अब यह आखिरी स्थाई पद पर माओवादी अपना दवा कर रही है। माओवादी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रीय सभा में सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण कुछ अन्य छोटे दलों को मिलाकर भी बहुमत पहुंच जाएगा। हालांकि उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नेपाली कांग्रेस भी माओवादी के दावेदारी का समर्थन कर देगी।
नेपाली कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि राष्ट्रीय सभा के रिक्त सदस्यों के चुनाव से पहले ही गठबंधन की बैठक में अध्यक्ष पद कांग्रेस पार्टी को मिलने की बात पर सहमति हो चुकी है। कांग्रेस पार्टी के महामंत्री गगन थापा ने कहा कि जिस समय राष्ट्रीय सभा सदस्यों के सीट का बंटवारा हो रहा था उसी समय खुद प्रधानमंत्री प्रचंड ने अध्यक्ष का पद कांग्रेस पार्टी को देने पर अपनी सहमति जताई थी। गगन थापा का कहना है कि उस बैठक में वो खुद भी मौजूद थे। 19 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस को 10 सीट देने और राष्ट्रीय सभा का अध्यक्ष पद देने पर गठबंधन के सभी दलों के बीच सहमति हो चुकी है। इसलिए अब इस सहमति से पीछे हटने का सीधा असर गठबंधन पर पड़ सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार/ पंकज दास/प्रभात