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गुवाहाटी, 23 फरवरी (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश के अगाली लिंगफा को इस बात की चिंता है कि गुवाहाटी से जब वह अपने गृह राज्य वापस जाएंगे तो रग्बी के प्रति उनका नया प्यार अधूरा रह जाएगा क्योंकि उनके राज्य में इस खेल के बारे में कोई नहीं जानता।
राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू), गुजरात का प्रतिनिधित्व करते हुए अगाली ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (केआईयूजी) 2023-अष्टलक्ष्मी में अपना काम पूरा कर लिया है। उनकी टीम अपने सभी चार मैच हारकर बाहर हो गई है लेकिन टीम के खराब प्रदर्शन के बावजूद 21 वर्षीय अरुणाचली रग्बी खिलाड़ी में प्रेरणा और उत्साह की कोई कमी नहीं है। अब वह अपने गृह राज्य में इस खेल के बीज बोने के लिए उत्सुक हैं।
अगाली ने पूर्वी कामेंग जिले के सेपा में एक फुटबॉलर के रूप में शुरुआत की और कुछ महीने पहले आरआरयू, गुजरात टीम के लिए चुने जाने के बाद ही रग्बी खिलाड़ी बन गए। वह इस खेल के लिए आवश्यक शक्ति और गति से तुरंत मोहित हो गए और गुजरात में अपने कार्यकाल से प्राप्त सीमित ज्ञान का उपयोग करके पासीघाट में एक टीम बनाना चाहते हैं।
अग़ाली ने कहा, “मुझे जल्द ही राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के पासीघाट परिसर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा और परिसर में कोई रग्बी टीम नहीं है। इसलिए, जब मैं कैंपस में शामिल होऊंगा, तो अपने कोचों से जो भी बुनियादी चीजें मैंने सीखी हैं, उनके साथ एक टीम बनाने की कोशिश करूंगा।”
अगाली ने आगे कहा,” अरुणाचल में इस खेल के बारे में कोई नहीं जानता। यह राज्य के लिए एक नया खेल है। मैं अंडर-14 बच्चों का मार्गदर्शन करके शुरुआत करना चाहता हूं। किसी को तो कदम उठाना ही होगा, मुझे क्यों नहीं? अगर मैं कोशिश नहीं करूंगा और यही सोचता रहूंगा कि मैं सफल होऊंगा या नहीं, तो यह काम नहीं करेगा।”
अगाली ने कहा, “अरुणाचल प्रदेश में कई फुटबॉल खिलाड़ी हैं और अगर उनमें से कुछ नए खेल के लिए स्वेच्छा से काम करते हैं तो हम एक टीम बना सकते हैं। नतीजे आएंगे, लेकिन पहले लोगों को खेल के बारे में समझाने की जरूरत है। मैं पासीघाट परिसर में यह प्रयास करूंगा। हम शुरुआत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोचों से मदद ले सकते हैं और फिर एक स्थायी कोच रख सकते हैं।”
बीए सिक्योरिटी मैनेजमेंट के छात्र ने कहा की वह पूर्वोत्तर राज्य में जमीनी स्तर की कोचिंग सुविधा स्थापित करने में मदद करने के लिए रग्बी इंडिया को मनाने की भी उम्मीद कर रहे हैं।
अगाली ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स की भी सराहना की और कहा कि इस मंच ने उन्हें और उनकी युवा आरआरयू टीम को यह आकलन करने में मदद की है कि वे अन्य शीर्ष विश्वविद्यालयों के मुकाबले कहां खड़े हैं।
अगाली ने आगे कहा,” यह मेरा पहला खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स है और यहां प्रतिस्पर्धा के स्तर को देखते हुए, हम बहुत सारी चीजें लेकर लौटेंगे। खेलों में ऐसे कई खिलाड़ी हैं, जिन्होंने देश के लिए खेला है, इसलिए ऐसे खिलाड़ियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने से आपको सीखने का मौका मिलता है, भले ही आप हार ही क्यों न जाएं।
हिन्दुस्थान समाचार /श्रीप्रकाश/प्रभात