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मुकुंद
केंद्र सरकार सारे देश में वर्षा जल की बूंद-बूंद सहेजने के लिए पिछले 10 साल से भगीरथ प्रयास कर रही है। कुछ जगह अब इसके सुखद और सार्थक परिणाम सामने आने लगे हैं। उत्तर प्रदेश ने बड़ी खुशखबरी दी है। राज्य में गेहूं और धान की सरकारी खरीद का आंकड़ा लंबे समय तक अकाल का पर्याय रहे बुंदेलखंड के लिए नई उम्मीद जगाता है, क्योंकि यह वही इलाका है जहां कभी केंद्र सरकार मालगाड़ी से पानी भेजती थी। यहां से टैंकरों के माध्यम से पानी बांदा के चित्रकूट, मानिकपुर और सूखे के लिए अभिशप्त पाठा क्षेत्र में भेजा जाता था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने एक दशक में बुंदेलखंड खासकर बांदा और चित्रकूट का सूखा खत्म कर दिया है। प्रदेश की योगी सरकार ने भी इस अभियान में अहम भूमिका निभाई है। अब चित्रकूट के पाठा, मऊ, राजापुर में बासमती चावल महक रहा है। बाकी जगह गेहूं की फसल लहलहा रही है।
उत्तर प्रदेश में पिछले साल 15 जून तक गेहूं की कुल सरकारी खरीद (न्यूनतम समर्थन मूल्य) 20 4000 मीट्रिक टन की गई। इसमें अकेले चित्रकूट और राजापुर से 75270 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। चित्रकूट मंडल के किसानों ने 41076 मीट्रिक टन उत्तर प्रदेश सरकार को बेचा। चित्रकूट मंडल उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा। दूसरे नंबर पर बुंदेलखंड मंडल रहा। झांसी से 34194 मीट्रिक टन गेहूं सरकार ने खरीदा। तीन-चार दशक पहले अपने गांव जखनी का सूखा खत्म करने के लिए ”खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड़” अभियान शुरू करने वाले पद्मश्री से सम्मानित उमाशंकर पाण्डेय इस बदली हुई तस्वीर का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देते हैं। वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने सारे देश को ”खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड़” अभियान से जोड़कर जल संरक्षण की पुरखों की विधि को जीवंत कर दिया है। इन प्रयासों की वजह से 30 लाख क्विंटल से अधिक बासमती उत्पादन चित्रकूट मंडल कर रहा है। बुंदेलखंड के किसान राष्ट्र और समाज को मजबूत कर रहे हैं। बांदा जिले के 10,000 से अधिक किसानों ने खेत पर मेड़बंदी की है। अब तक 25,000 से अधिक किसानों ने सामुदायिक प्रयास से मेड़बंदी कर वर्षा की बूंदों को रोका है। इससे पलायन रुका है। लोग बड़े पैमाने पर पशुपालन कर रहे हैं। दुग्ध उत्पादन और सब्जियों की पैदावार से समृद्धि आई है। पानी के लिए अब हाहाकार नहीं मचता।
पाण्डेय कहते हैं कि एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार बांदा जिले के जिन गांवों में कभी 200 बीघा जमीन में धान की पैदावार होती थी उनमें अब हजार बीघा से अधिक जमीन में धान की पैदावार हो रही है। जिस गांव के रकबे में 20 फीसद फसल पैदा होती थी वहां 95 प्रतिशत फसल पैदा होने लगी है। भू-जल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार दो मीटर जलस्तर बांदा जिले का ऊपर आया है। यह बड़े बदलाव का संकेत है। जल संरक्षण की परंपरागत सामुदायिक विधि को आज सूखा प्रभावित सभी राज्य के किसान अपना रहे हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़,बिहार और झारखंड में भी किसान बड़ी संख्या में आगे आए हैं। ”खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड़” को सर्वप्रथम बांदा जिले की 470 ग्राम पंचायत में प्रशासन ने लागू किया था। अब तो उत्तर प्रदेश सरकार ने संपूर्ण प्रदेश को इससे जोड़ दिया है। नीति आयोग और जल शक्ति मंत्रालय ने संपूर्ण भारत के लिए इसे उपयुक्त माना है। अटल भू-जल योजना सहित अनेक योजनाओं में जल संरक्षण के इस मॉडल पर अमर किया जा रहा है। वह कहते हैं कि बुंदेलखंड में कभी एक किलोग्राम बासमती चावल पैदा नहीं होता था। जखनी में इसकी शुरुआत 2007 में हुई। इस प्रयोग ने सूरत बदल दी। ”खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड़” ऐसी जल संरक्षण की तकनीक है कि कोई भी फावड़े से अपने खेत की मेड़बंदी कर सकता है। उस पर सहजन, करौंदा, नींबू, अमरूद और अरहर और औषधि फसल का उत्पादन कर अतिरिक्त आमदनी की जा सकती है।
अमृतकाल में हो रहे बदलावों में सामुदायिक और सरकारी प्रयास तो रंग ला रहे हैं, मगर यह दावे से कहा जा सकता है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हो तो संकल्प सिद्धि में देर नहीं लगती। मोदी सरकार का मानना है कि इन उपायों का कार्यान्वयन सतत प्रक्रिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश की बागडोर संभालने के सालभर बाद ही 2015 में 500 शहरों में अटल मिशन शुरू किया गया। इसके तहत लगभग 4,900 कस्बों तक जलापूर्ति सुनिश्चित की गई। एक अक्टूबर 2021 को अमृत 2.0 की शुरुआत की गई। अमृत 2.0 शहरों को ‘आत्मनिर्भर’ और ‘जल सुरक्षित’ बनाने पर केंद्रित है। इसके तहत जल स्रोत और कुओं का कायाकल्प किया जा रहा है। भारी वर्षा के दौरान नालों के माध्यम से वर्षा जल (जिसमें सीवेज नहीं मिल रहा है) को संग्रहित किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स के सहयोग से नवंबर, 2021 में रिवर सिटीज अलायंस शुरू किया है। गंगा नदी के तट पर 30 शहरों के साथ अब 142 नदी शहर इसके सदस्य हैं। कैच द रेन पर भी फोकस किया गया है। यह जानकारी जल शक्ति राज्य मंत्री बिश्वेश्वर टुडू ने सोमवार को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी है।
(लेखक, हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)
हिन्दुस्थान समाचार/मुकुंद
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