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गुवाहाटी, 26 फरवरी (हि.स.)। असम विधानसभा में आज असम उपचार (बुराइयों की रोकथाम) प्रथा विधेयक 2024 पारित कर दिया गया। इसके जरिए राज्य में तमाम गलत तरीके से किये जा रहे उपचार तथा इसके नाम पर लोगों को झांसा देने का कारोबार बंद हो सकेगा। इस विधेयक के पारित होने से झोलाछाप डॉक्टर तथा नीम हकीमों की दुकानें भी बंद हो जाएंगी। इस प्रकार के किसी कानून के नहीं होने की वजह से जहां समाज में चिकित्सा के नाम पर अंधविश्वास फैलाया जा रहा था। वहीं, लोगों का आर्थिक तथा शारीरिक शोषण भी किया जाता था। झाड़-फूंक के नाम पर प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में लोगों को गुमराह करके बेमौत मार दिया जाता है। अब इस कानून के बनने से ऐसा करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने का रास्ता साफ हो जाएगा।
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार अब इस प्रकार के किसी भी दवा या उपचार से संबंधित विज्ञापन पर भी प्रतिबंध लग जाएगा। इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार इससे संबंधित मामले गैर-जमानती होंगे तथा पहले अपराध के लिए तीन साल की कैद एवं 50 हजार रुपए का जुर्माना होगा। इसके बाद दोषी पाए जाने पर पांच साल तक की कैद तथा एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है।
विधेयक पारित होने से पहले हुई इस पर चर्चा में प्रतिपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया समेत कई विधायकों ने भाग लिया। सैकिया ने कहा कि इस कानून में ‘बुरी प्रथाओं’ की चर्चा की गई है, जिसमें स्पष्टता की कमी है। सैकिया ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां अलग-अलग समुदाय में अलग-अलग प्रकार से हैं। स्पष्टता की कमी के कारण कौन सी पद्धति अपराध के दायरे में आएगी और कौन सी नहीं यह समझना कठिन होगा। सैकिया ने कहा कि सरकार इसके बदले समान नागरिक संहिता ला सकती थी।
विधायकों की इस चिंता पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि इस समस्या का समान नागरिक संहिता से कोई लेना-देना नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विधेयक के पारित करने का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर प्रतिबंध लगाना नहीं है, बल्कि आर्थिक लाभ के लिए लाईलाज बीमारियों का ईलाज करने का दावा करने वालों पर अंकुश लगाना है।
आज विधानसभा में 14 अन्य विधेयक पारित किए गए, जिनमें सरकारी पदों की भर्तियों में अनुचित तरीके का इस्तेमाल करने के विरुद्ध विधेयक भी शामिल है।
हिन्दुस्थान समाचार /श्रीप्रकाश/अरविंद