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प्रताडऩा-मारपीट के विरोध में हजारों आदिवासियों ने किया जंगी प्रदर्शन
बैतूल, 16 फरवरी (हि.स.)। आदिवासियों के साथ बर्बतापूर्वक मारपीट एवं प्रताडऩा की घटनाओं के विरोध में सर्व आदिवासी समाज संगठन द्वारा शुक्रवार को किया गया बैतूल बंद का आव्हान पूरी तरह सफल रहा। आदिवासी संगठनों की धमक का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ एक अपील पर शुक्रवार को बैतूल शहर के मार्केट बंद रहे।
पूर्व में हुए आदिवासी संगठनों के अंदोलनों के दौरान बिगड़ी कानून व्यवस्था से सबक लेकर शुक्रवार को सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम किये गये थे। बैतूल बंद के दौरान कानून व्यवस्था के मद्देनजर रेंज आईजी इरशाद वली एवं रेंज डीआईजी सचिन अतुलकर गुरूवार से ही बैतूल में कैम्प किये हुए थे। बैतूल बंद के दौरान आदिवासी संगठनों द्वारा निकाली गई रैली और आमसभा में सुरक्षा व्यवस्था के चलते लगभग 700 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती से शहर छावनी में तब्दील हो गया था। डायरेक्टर आईपीएस नरेन्द्र रावत एवं एएसपी कमला जोशी के नेतृत्व में लगभग एक सैंकड़ा सुरक्षाकर्मी रैली के साथ चलते रहे। रैली में शामिल हजारों आदिवासी महिला पुरूषों द्वारा लगाये गये ‘गांव-गांव से आये है शहर सुधारकर जायेंगे’, ‘देखो-देखो कौन आया आदिवासी शेर आया,’आदिवासियों के साथ प्रताडऩा बर्दाशत नहीं करेंगे, के गगनभेदी नारों से शहर गूंज उठा। आदिवासी संगठनों के आंदोलन के दौरान शांति व्यवस्था कायम रहने से प्रशासन-पुलिस अफसरों ने राहत की सांस ली।
आईजी-डीआईजी ने किया कैम्प
आदिवासी युवकों के साथ बर्बरता पूर्वक मारपीट एवं प्रताडऩा से आक्रोशित आदिवासी समाज संगठनों द्वारा विरोध स्वरूप बैतूल बंद का एलान करने से कानून व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक-पुलिस अफसरों का टेंशन बढ़ गया था। आदिवासियों के आंदोलन को गंभीरता से लेकर रेंज आईजी ईरशाद वली एवं डीआईजी सचिन अतुलकर ने गुरूवार से ही बैतूल में कैंप किया हुआ था। बताया जाता है कि बैतूल बंद, रैली एवं आमसभा के दौरान कानून व्यवस्था के मद्देनजर आईजी, डीआईजी के मार्गदर्शन में बैतूल शहर में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। शुक्रवार को आईजी, डीआईजी दिन भर पूरी स्थिति पर नजर रखे रहे।
चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती
आदिवासी संगठनों द्वारा किये गये बैतूल बंद के आव्हान और रैली में जिले भर से हजारों आदिवासियों के शामिल होने का इनपुट मिलने पर इंदौर और छिंदवाड़ा से भी पुलिस फोर्स बुलवाया गया था। बैतूल शहर के चप्पे-चप्पे पर इंदौर, छिंदवाड़ा, जिला पुलिस एवं वन विभाग के लगभग 700 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। रैली के सुगमता से निकलने के लिए पुलिस मोबाईलों द्वारा मार्केट में घूम-घूमकर सड़कों से वाहनों को हटवाया गया। ऐहतियात के तौर पर सार्वजनिक स्थलों पर फायर ब्रिगेड, छोटी क्रेन भी खड़ी करवाई गयी थी। रैली के साथ लगभग एक सैंकड़ा सुरक्षाकर्मी चल रहे थे। साथ ही जगह-जगह फिक्स पाइंट बनाकर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। जिन मार्गो से रैली निकलने वाली थी वहां का रूट डायवर्ट भी किया गया।
मिलाजुला रहा बंद का असर
आदिवासियों के आव्हान के बाद बैतूल आंशिक बंद रहा। कोठीबाजार इलाके में दुकानें प्रतिष्ठान बंद रहे। बंद का असर यहां कोठीबाजार इलाके में देखने को मिला। हालांकि संगठन के लोग बाइक पर सवार होकर दुकानदारों से बंद की अपील करते देखे गए। इस बीच पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस बल तैनात किया है।
प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी रैली, सौंपा ज्ञापन
यह रैली शहर के कोठीबाजार क्षेत्र से शुरू होकर बैतूल गंज पहुंची। जहां से कालेज चौक होते हुए कोतवाली थाना और बस स्टैंड होकर ऑडिटोरियम पहुंची जहां एक सभा का आयोजन किया गया। जहां आदिवासी नेताओं ने समाज के लोगों को संबोधित किया। यहां उन्होंने प्रशासन को चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भी राज्यपाल के नाम सौंपा है। रैली का नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य संदीप धुर्वे ने किया। इस मौके पर आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम, रामा ककोडिय़ा, दिलीप धुर्वे भी मौजूद थे। नेताओं ने इस दौरान आदिवासी प्रताडऩा के मामलों में पुलिस कार्रवाई में देरी का मुद्दा उठाया। ज्ञापन में मांग की गई है कि 13 फरवरी को सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला कि जिले के अंतर्गत ग्राम बांसपानी निवासी अशीष परते को निर्वस्त्र कर उल्टा लटकाकर हाथ पैर बांधकर उसे बेरहमी से पीटा गया। यह घटना पूरे जिले को शर्मसार करने वाली घटना हैं।
मलकापुर में भी घटित हुई थी घटना
ग्राम मलकापुर में 16 जनवरी, 28 जनवरी 2024 को रात्रि 10 से 11 बजे के बीच कुछ असामाजिक तत्वों ने मलकापुर के पूर्व सरपंच बुदल धुर्वे के घर में घुस कर तलाश किया था। उनकी पत्नी व मां के साथ धक्का-मुक्की कर अभद्र व्यवहार किया था। साथ ही धमकी देते हुए कहा कि घर से निकले की तुम्हें जान से मार देंगे। जैसे ही घटना की एफआईआर करने के समय ग्राम के ग्रामीणों के साथ बुदल धुर्वे गंज थाना बैतूल पहुंचे। इसकी शिकायत थाना प्रभारी डेहरिया ने लेने से इनकार कर दिया और उन्हें भगा दिया गया ऐसे अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
बजरंग दल नेता पर हो कार्यवाही
बैतूल शहर में विगत दिनों रात्रि करीब 11:30 बजे राज उईके नामक आदिवासी व्यक्ति को चंचल राजपूत व साथियों की ओर से घेरकर मारपीट की गई। बताया जा रहा हैं कि ये सारे लोग आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। बजरंग दल के कार्यकर्ता हैं, जिनका व्यक्ति को पीटते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ हैं। ऐसे कृत्य करने वाले अपराधियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। घटना को देखते हुए सर्व समाज ने 1 करोड़ रूपए मानहानि का दावा करने का फैसला लिया है।
हिन्दुस्थान समाचार/विवेक