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रायगढ़, 04 फरवरी (हि.स.)। सर्वप्रथम वन-नेशन वन-इलेक्शन का सुझाव देने वाले रामरथ के सारथी पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को देश के सर्वोच्च सम्मान भारतरत्न से सम्मान दिया जाना, पूरे भारतवर्ष के लिए गौरव का विषय है।
रायगढ़ जिला भाजपा मंत्री महेश साहू ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि 70 सालों की राजनीति में उन्होंने कभी भी सुचिता का दामन नहीं छोड़ा। आडवाणी की राजनीतिक यात्रा संघ प्रचारक के रूप में जयपुर से शुरू हुई थी और आज तक वे एक स्वयंसेवक के रूप में ही डटे हुए हैं। उन्होंने साल 1990 में अयोध्या के लिए राम-रथयात्रा निकाली थी, जिसने यूपी की राजनीति को ही पलट दिया। यह यात्रा गुजरात से निकाल कर अयोध्या पहुंची थी। जिसने उत्तरप्रदेश की सियासी तस्वीर और तकदीर दोनों को बदल कर रख दिया।
साल 1990 के 25 सितंबर को आडवाणी की अगुवाई में गुजरात स्थित सोमनाथ से यूपी स्थित अयोध्या के लिए रथ-यात्रा शुरू करने के बाद आडवाणी ने एक संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ”सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे।” इस रथ-यात्रा में आडवाणी के साथ नरेंद्र मोदी भी साथ थे। वहीं आज जब उनकी सौगंध पूर्ण हो गई, श्रीराम जी का मंदिर वहीं पर बना और फिर मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद उन्हें भारतरत्न से सम्मानित किया जाना, पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है।
हिन्दुस्थान समाचार /रघुवीर प्रधान