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भागलपुर, 03 फरवरी (हि.स.)। कला केंद्र भागलपुर में परिधि सृजन मेला की तैयारी को लेकर शनिवार को एक बैठक उज्जवल घोष की अध्यक्षता में की गई।
बैठक में सृजन मेला के उद्देश्यों पर अपनी बात रखते हुए संस्कृतिकर्मी उदय ने कहा कि परिधि सृजन मेला का आयोजन लगभग 30 वर्षों से हो रहा है। अपसंस्कृति के खिलाफ अग्रगामी सांस्कृतिक माहौल बनाने के उद्देश्य से यह आयोजन होता रहा है। 20- 25 वर्ष पहले जो सीजन मेला में प्रतिभागी बनकर आते थे आज उनके बच्चे प्रतिभागी बन रहे हैं। आज कल सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम पर छोटी-छोटी बच्चियों को भोंडे और अश्लील गीतों पर नृत्य करवाया जाता है।
अनजाने में अभिभावक भी इस अब सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा बन जाते हैं। सृजन मेला कला, संस्कृति और लोक कला के उन्नयन हेतु क्या जाने वाला प्रयास है। संगीत शिक्षक विनय कुमार भारती ने कहा कि मैं कभी सृजन मेला में बाल प्रतिभागी के तौर पर शामिल होता था, इसने हमें आगे बढ़ने का उत्साह और मंच प्रदान किया और आज संगीत शिक्षक बन सका हूं।
बैठक में यह तय हुआ कि इस वर्ष सृजन मेला का आयोजन 20 से 25 अप्रैल के बीच होगा। 20 और 21 अप्रैल को विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं आयोजित होगी। जिसमें चित्र, नाटक, लोकगीत, शास्त्रीय गीत, शास्त्रीय नृत्य, कथक, भरतनाट्यम, मंजूषा चित्रकला आदि की प्रतियोगिताएं तो होगी ही साथी साथ बच्चों को मिट्टी से जोड़ने के उद्देश्य से मिट्टी खिलौना निर्माण की भी प्रतियोगिताएं होंगी। शारदा श्रीवास्तव ने कहा कि सृजन मिला ऐसा कार्यक्रम है जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग व्यक्ति भी प्रतिभागी होते हैं।
कला केंद्र के प्राचार्य राजीव ने बताया कि पूर्वी बिहार में एकमात्र सृजन मेला ही एक ऐसा अवसर है जिसमें कला, शिल्प प्रदर्शनी का आयोजन होता है इसलिए इस क्षेत्र के कलाकारों को सृजन मेला का वर्ष भर इंतजार रहता है। चित्र शिल्प प्रदर्शनी का आयोजन 23 अप्रैल से 25 अप्रैल तक होगा। जिसमें स्थानीय कलाकारों के अलावे रांची, पटना, जमुई, साहिबगंज, बांका, मुंगेर आदि के वरिष्ठ कलाकारों के भी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। भरतनाट्यम की नृत्य शिक्षिका नीना एस प्रसाद ने सृजन मेला में देश की विविध संस्कृति पर केंद्रित रूप सज्जा प्रतियोगिता भी जोड़ने का अनुरोध किया जिस बैठक में स्वीकार कर लिया गया। सांस्कृतिक रूप सजा प्रतियोगिता में बच्चे भारत के भिन्न-भिन्न संस्कृतियों, उसके पहनावा-ओढ़ावा की खूबसूरत प्रस्तुति करेंगे। समूह नृत्य में सिर्फ शुद्ध संस्कृत शास्त्रीय या लोक गीतों या धुनों के ही इस्तेमाल की अनुमति होगी। फूहड़, फ़िल्मी और कमर्शियल गानों पर नृत्य वर्जित होंगे। अध्यक्षता करते हुए उज्जवल कुमार घोष ने कहा कि सृजन मेला अपसंस्कृति के खिलाफ सांस्कृतिक पहला है जिसमें हर समुदाय के बच्चों को आगे बढ़ाने हेतु मंच प्रदान किया जाता है। इस आयोजन से बच्चों में सामूहिकता, समाज के प्रति संवेदनशीलता और वैज्ञानिक सोच के साथ संस्कृति को संजोना संवारने का जज्बा पैदा होता है। बैठक में ललन, राजेश कुमार झा, नीना एफ प्रसाद, मनोज कुमार, शोभा श्रीवास्तव, शशि शंकर, शारदा श्रीवास्तव, संगीता, मृदुला सिंह, संजय कुमार, रजनी कुमारी, चंदन कुमार, विनय कुमार भारती आदि मौजूद थे।
हिन्दुस्थान समाचार/बिजय