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मुंबई,01 फरवरी (हि. स.)। पालघर जिले के दहानू स्थित वाढ़वन में प्रस्तावित केंद्र सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट वाढ़वन बंदरगाह को लेकर मछुआरे और स्थानीय लोग आगबबूला है और वह इस परियोजना को रद्द करने की लगातार मांग कर रहे है। लेकिन सरकार स्थानीय लोगों की मांगों को अनसुना करते हुए अपने हठ पर डटी हुई है।
गुरुवार को बोईसर के महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के कार्यालय पर वाढ़वन बंदरगाह विरोधी संघर्ष समिति, मछुआरों के संगठनों सहित बंदरगाह का विरोध कर रहे अन्य संगठनों के हजारों लोगों ने मार्च निकाला और परियोजना के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी, कि 19 जनवरी को प्रस्तावित बंदरगाह पर सार्वजनिक हुई सुनवाई, सभी नियम, कानून और न्यायिक प्रक्रियाएं को ताख पर रख की गई थी। इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए और सभी सर्वेक्षणों और शर्तों को पूरा करने के बाद ही फिर सार्वजनिक सुनवाई आयोजित किया जाना चाहिए। बंदरगाह का विरोध कर रहे संगठनों का कहना थी, कि
बंदरगाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट में भी याचिकाएँ दायर की गईं, बंदरगाह के संबंध में 19 जनवरी, 2024 को आयोजित पर्यावरणीय सार्वजनिक सुनवाई केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का उल्लंघन थी।
प्रदर्शनकारियों का कहना थी, कि परियोजना स्थल के बजाय जिला मुख्यालय के पास सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की गई थी। यह केंद्र की 2007 की अधिसूचना का उल्लंघन था, साथ ही सार्वजनिक सुनवाई को बीच में ही रोक दिया गया और पूर्ण घोषित कर दिया गया, जो अनुचित है, जिस स्थान पर बंदरगाह की स्थापना की जा रही है वह पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है और औद्योगिक रूप से रेड ज़ोन है। लोगों का कहना था, कि यह मार्च सरकार की आंखे खोलने के लिए आयोजित किया गया था। लोगों का कहना था कि बंदरगाह के निर्माण से मछुआरों का मछली पकड़ना बंद हो जाएगा और किसान,मछुआरे, बागवान और डाई बनाने वाले लोगों को रोजी -रोटी छीन जायेगी।
समुंदर हमारे हक का, नही किसी के बाप का
समुद्र हमारे हक है, यह किसी के बाप का नही है।हम इसे कैसे दे सकते हैं। बंदरगाह रद्द करो, बंदरगाह हटाओ और पर्यावरण बचाओ जैसे गगन चुंबी नारे प्रदर्शनकारी लगा रहे थे। प्रदर्शन में आदिवासी और मछुआरों के संगठनों के करीब दो हजार लोग शामिल थे। जिसमे बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रही।
प्रदर्शनकारियों के मार्च को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के गेट के पास पुलिस ने रोक दिया।इस दौरान मार्च करने वालों ने जमकर नारेबाजी की और बंदरगाह रद्द करने की मांग की।
बंदरगाह विरोधी समिति के वैभव वझे ने कहा, हमने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को ज्ञापन देकर चेताया है, कि 1974-75 के बाद से, इस क्षेत्र में स्थित औद्योगिक कारखानों से होने वाले प्रदूषण के कारण हमारा मछली पकड़ने का व्यवसाय बंद हो गया है और प्रदूषण न हो इसलिए हम बंदरगाह परियोजना का विरोध कर रहे है। हिंदुस्थान समाचार/योगेंद्र